मॉरीशस में किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट शुरू, भारत-मॉरीशस संबंधों में नई मजबूती

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मॉरीशस के जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में रीनल ट्रांसप्लांट यूनिट का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह पहल भारत और मॉरीशस के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण और मानवीय कदम है, जो दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देता है।

उन्होंने बताया कि यह मॉरीशस की पहली समर्पित रीनल ट्रांसप्लांट यूनिट है। यह केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि नहीं है, बल्कि किडनी रोगियों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। अब मरीजों को इलाज के लिए विदेश जाने की आवश्यकता नहीं होगी और उन्हें अपने ही देश में उन्नत चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।

जयशंकर ने भारत और मॉरीशस के रिश्तों को ‘दिल का रिश्ता’ बताते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध केवल कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह गहरे भावनात्मक और पारिवारिक जुड़ाव पर आधारित हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश साझा करते हुए कहा कि मॉरीशस भारत के लिए केवल साझेदार नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि इस यूनिट के शुरू होने से मरीजों को अपने घर के पास ही इलाज की सुविधा मिलेगी, जिससे उनका खर्च कम होगा और मानसिक तनाव भी घटेगा। यह सुविधा कई लोगों के जीवन को बचाने और बेहतर बनाने में सहायक सिद्ध होगी।

विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि भारत और मॉरीशस के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। हाल ही में मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम के भारत दौरे के दौरान एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की गई थी, जिसमें स्वास्थ्य क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी गई है।

जयशंकर ने आगे बताया कि दोनों देशों के बीच कई नई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें सर शिवसागर रामगुलाम नेशनल हॉस्पिटल, आयुष सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, वेटनरी स्कूल और एनिमल हॉस्पिटल जैसी योजनाएं शामिल हैं, जो सहयोग के अगले चरण को दर्शाती हैं।

उन्होंने भारत-मॉरीशस विकास साझेदारी के तहत पहले से स्थापित संस्थानों का भी उल्लेख किया। इनमें महात्मा गांधी संस्थान, राजीव गांधी विज्ञान केंद्र, अटल बिहारी वाजपेयी साइबर टावर, विश्व हिंदी सचिवालय और स्वामी विवेकानंद अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र प्रमुख हैं। ये संस्थान दोनों देशों के मजबूत और दीर्घकालिक संबंधों का प्रमाण हैं।

अंत में उन्होंने कहा कि भारत और मॉरीशस के बीच यह सहयोग केवल परियोजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों के जीवन को बेहतर बनाने और उनकी जरूरतों को पूरा करने का माध्यम है। यह साझेदारी दोनों देशों के बीच विश्वास और मानवीय मूल्यों को दर्शाती है।

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