कन्हारीकला की सुहनिया मरावी का संघर्ष लाया रंग, मेहनत और आजीविका मिशन के सहयोग से बदली जनजातीय समाज की तस्वीर

मंडला जिले के एक छोटे से गांव कन्हारीकला की रहने वाली श्रीमती सुहनिया मरावी ने अपनी कड़ी मेहनत से अपनी तकदीर बदल दी है। एक समय बंजर खेतों और गरीबी से जूझने वाली सुहनिया आज एक सफल महिला उद्यमी और ‘लखपति दीदी’ के रूप में जानी जाती हैं। उनकी इस अनुकरणीय सफलता ने उन्हें राजभवन तक पहुँचाया, जहाँ राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने उनके कार्यों की सराहना की। सुहनिया की यह यात्रा अभावों से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने का एक जीवंत दस्तावेज है।
आजीविका मिशन से जुड़ने से पहले सुहनिया का परिवार आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा था। सिंचाई की अनुपलब्धता के कारण उनकी 4 एकड़ जमीन खेती के लिए अनुपयुक्त थी और घर का खर्च चलाने के लिए वे केवल अपने पति की ट्रक ड्राइविंग की कमाई पर निर्भर थीं। बदलाव की दिशा में कदम उठाते हुए उन्होंने स्व-सहायता समूह के माध्यम से ऋण लिया और एक पुराना ट्रैक्टर खरीदकर उसे किराए पर देना शुरू किया। इस व्यावसायिक सूझबूझ ने उनकी आय के द्वार खोल दिए और जल्द ही वे ऋण मुक्त हो गईं।
ट्रैक्टर से हुई कमाई का निवेश उन्होंने अपनी ‘बर्रा’ जमीन को सुधारने में किया, जिससे वहां धान और मौसमी मटर की फसलें लहलहाने लगीं। अपने कृषि कारोबार को विस्तार देने के लिए उन्होंने थ्रेशर मशीन और लोडर भी खरीदे, जिससे अन्य किसानों को भी कृषि कार्यों में सुविधा मिली और सुहनिया की आय में कई गुना वृद्धि हुई। हाल ही में उन्हें पशुपालन योजना का लाभ भी मिला है, जिससे उनकी आजीविका के स्रोतों में एक और नया आयाम जुड़ गया है।
श्रीमती मरावी की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उन्होंने अपनी सफलता को स्वयं तक सीमित नहीं रखा। ‘बैगाचक फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन’ की डायरेक्टर के तौर पर वे हजारों महिलाओं को खेती और व्यापार के आधुनिक तरीके सिखा रही हैं। उनके प्रयासों से जनजातीय महिलाएं अब कोदो-कुटकी जैसी पारंपरिक फसलों को वैज्ञानिक तरीके से उगाकर और उन्हें बाजार में सही दाम पर बेचकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। सुहनिया मरावी आज सही मायने में ग्रामीण विकास और महिला नेतृत्व की पथप्रदर्शक बन चुकी हैं।


