594 किमी लंबा गंगा एक्सप्रेसवे राष्ट्र को समर्पित: आर्थिक समृद्धि का बनेगा आधार

उत्तर प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य को बदलने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। 594 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर अब भारत के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शुमार हो गया है। मेरठ से शुरू होकर प्रयागराज तक जाने वाला यह मार्ग पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच की भौगोलिक और आर्थिक दूरी को कम करेगा। इस परियोजना का निर्माण रिकॉर्ड 3.5 साल के भीतर पूरा किया गया है, जिसमें अदाणी रोड ट्रांसपोर्ट लिमिटेड का प्रमुख योगदान रहा है।
एक्सप्रेसवे के चालू होने से पूर्वी उत्तर प्रदेश की आर्थिक क्षमता को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। कनेक्टिविटी के अभाव में पिछड़ रहे इस क्षेत्र को अब राज्य के विकसित बाजारों से सीधा जोड़ा गया है। यात्रा समय में 5 घंटे की भारी कटौती (11 घंटे से घटकर 6 घंटे) माल ढुलाई की लागत को कम करेगी और कृषि उत्पादों के परिवहन को गति देगी। इससे किसानों को अपनी उपज का सही मूल्य और बेहतर बाजार उपलब्ध हो सकेगा।
इस परियोजना में तकनीकी नवाचार का विशेष ध्यान रखा गया है। पूरे मार्ग पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कैमरों की निगरानी रहेगी, जो सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा कदम है। रक्षा आवश्यकताओं को देखते हुए शाहजहांपुर में एक विशेष हवाई पट्टी (इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी) भी बनाई गई है, जो वायुसेना के लड़ाकू विमानों के लिए उपयोग की जा सकेगी। यह कॉरिडोर मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जैसे जिलों से होकर गुजरता है।
आर्थिक विशेषज्ञों और सरकारी अनुमानों के अनुसार, यह परियोजना अगले 10 वर्षों में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी करेगी। लॉजिस्टिक्स सेक्टर में होने वाली बचत और इन्वेंट्री लागत में कमी से उद्योगों को सीधा फायदा होगा। एक्सप्रेसवे के किनारे प्रस्तावित 11 औद्योगिक कॉरिडोर न केवल निवेश आकर्षित करेंगे, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए लाखों की संख्या में नौकरियों के अवसर भी पैदा करेंगे।
आर्थिक लाभ के साथ-साथ यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के पर्यटन मानचित्र को भी सशक्त करेगा। त्रिवेणी संगम (प्रयागराज), कल्किधाम और बेल्हादेवी जैसे सात प्रमुख धार्मिक व पर्यटन स्थलों तक पहुँचना अब सुलभ हो जाएगा। इस बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा लाभ क्षेत्र की करीब 8 करोड़ आबादी को मिलेगा, जिससे स्थानीय व्यापार और छोटे उद्यमियों की आय में वृद्धि सुनिश्चित होगी। यह एक्सप्रेसवे भविष्य की जरूरतों को देखते हुए विस्तार की क्षमता भी रखता है।



