जनरल उपेंद्र द्विवेदी की अमेरिका यात्रा संपन्न: रक्षा नीति और भविष्य के संयुक्त अभियानों पर पेंटागन में हुआ मंथन

थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के चार दिवसीय अमेरिका दौरे ने भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को एक नई रणनीतिक दिशा प्रदान की है। 20 अप्रैल को शुरू हुई इस यात्रा के दौरान जनरल द्विवेदी ने अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ‘पेंटागन’ के शीर्ष अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय सैन्य संबंधों के भविष्य का खाका तैयार किया। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उभरती सुरक्षा चुनौतियों के बीच यह दौरा दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और रक्षा सहयोग की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
पेंटागन में हुई वार्ताओं में जनरल द्विवेदी ने अमेरिकी सेना सचिव डेनियल पी ड्रिस्कॉल और कार्यवाहक चीफ ऑफ स्टाफ जनरल क्रिस्टोफर लानेव के साथ गहन चर्चा की। इन मुलाकातों का मुख्य एजेंडा संयुक्त प्रशिक्षण, आधुनिक युद्धक क्षमताओं का आदान-प्रदान और रक्षा प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाना था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर की वार्ताएं क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और दोनों सेनाओं के बीच परिचालन संबंधी समझ को गहरा करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
रणनीतिक संवाद के क्रम में जनरल द्विवेदी ने अंडर सेक्रेटरी एल्ब्रिज कोल्बी और जनरल स्टीवन एस नॉर्डहॉस के साथ रक्षा नीति के सूक्ष्म पहलुओं पर चर्चा की। इस दौरान भविष्य में सहयोग के लिए नए क्षेत्रों की पहचान की गई, जिससे दोनों देशों के बीच संस्थागत सहयोग को और अधिक मजबूती मिलेगी। बैठक में स्पष्ट किया गया कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भारत और अमेरिका का सैन्य रूप से करीब आना वैश्विक शांति के हित में है।
अपने दौरे के दौरान सेना प्रमुख ने भारतीय वेटरन्स के साथ समय बिताकर उनके सेवा भाव की सराहना की। उन्होंने पूर्व सैनिकों को प्रेरणा का स्रोत बताते हुए कहा कि अमेरिका में बसा भारतीय सैन्य समुदाय दोनों देशों की आपसी समझ को गहरा करने में अमूल्य भूमिका निभा रहा है। यात्रा के एक गरिमामयी क्षण में, जनरल द्विवेदी ने अर्लिंग्टन नेशनल सेमेट्री में वीर सैनिकों को पुष्पांजलि अर्पित कर उनके अदम्य साहस और बलिदान के प्रति सम्मान व्यक्त किया। यह दौरा न केवल रक्षा क्षेत्र में तकनीकी प्रगति की पुष्टि करता है, बल्कि सैनिकों के त्याग के प्रति साझा सम्मान को भी उजागर करता है।



