मध्य प्रदेश में श्रमिक कल्याण को नई ऊंचाई: मुख्यमंत्री ने ‘श्रम स्टार रेटिंग’ और सहायता राशि के जरिए सुदृढ़ की सामाजिक सुरक्षा

मध्य प्रदेश सरकार ने श्रमिकों के आर्थिक सशक्तिकरण और कार्यस्थल पर उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए बहुआयामी रणनीति अपनाई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान 27,000 से अधिक हितग्राही परिवारों को 600 करोड़ रुपये की सहायता राशि वितरित की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य केवल वित्तीय सहायता देना ही नहीं, बल्कि श्रमिकों के लिए एक सुरक्षित कार्य परिवेश तैयार करना भी है, जिसमें ‘गिग वर्कर्स’ जैसे उभरते हुए कार्यबल को भी समान स्थान दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने ‘श्रम स्टार रेटिंग’ प्रणाली पर जोर देते हुए कहा कि यह पहल औद्योगिक संस्थानों की विश्वसनीयता बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी। इस रेटिंग के माध्यम से उन कारखानों की पहचान की जाएगी जो श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन करते हैं और अपने कर्मचारियों के स्वास्थ्य का ध्यान रखते हैं। उन्होंने इसे एक जन-आंदोलन का रूप देने का आह्वान करते हुए कहा कि समाज को भी ऐसे संस्थानों को प्रोत्साहित करना चाहिए जो श्रमिक कल्याण को प्राथमिकता देते हैं। वर्तमान में प्रदेश के सैकड़ों कारखाने इस मुहिम का हिस्सा बन चुके हैं।

बैठक में केंद्र और राज्य की समन्वित नीतियों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नई श्रम संहिताओं के कार्यान्वयन में मध्य प्रदेश कोई कसर नहीं छोड़ेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े मजदूर तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने बेहतर कार्य करने वाले जिलों का उदाहरण देते हुए पूरे प्रदेश में सहायता वितरण की प्रक्रिया में तेजी लाने की अपेक्षा की।

श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं का स्वागत करते हुए योजना की अब तक की प्रगति का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि अब तक 8.27 लाख से अधिक प्रकरणों का निराकरण कर करोड़ों रुपये की राशि श्रमिकों के कल्याण पर खर्च की जा चुकी है। बैठक में मुख्यमंत्री कार्यालय के सचिव आलोक सिंह और श्रम सचिव एम. रघुराज सहित अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे, जहाँ भविष्य की कार्ययोजनाओं और श्रमिक हितों के संरक्षण पर विस्तृत चर्चा की गई।

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