प्रदेश में सुगम हुई गेहूँ खरीदी प्रक्रिया; मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत बोले- 9 लाख से अधिक किसानों से हुई फसल की खरीदी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के उपार्जन केंद्रों पर गेहूँ खरीदी की पारदर्शी और प्रभावी व्यवस्था लागू की है। मुख्यमंत्री द्वारा स्वयं केंद्रों के निरीक्षण और नियमित समीक्षा के चलते किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ रहा है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अब तक खरीदे गए गेहूँ के एवज में किसानों को 10,403.17 करोड़ रुपये का भुगतान सफलतापूर्वक किया जा चुका है। प्रदेश के किसान 23 मई तक अपनी फसल केंद्रों पर बेच सकेंगे।

खाद्य मंत्री श्री गोविन्द सिंह राजपूत ने कहा कि अब तक 9.38 लाख किसानों से 56.45 लाख मीट्रिक टन गेहूँ खरीदा गया है। उन्होंने बताया कि किसानों के हित में कार्यप्रणाली को और लचीला बनाया गया है, जिसके तहत रात 10 बजे तक तौल पर्ची और मध्यरात्रि 12 बजे तक देयक जारी करने की अनुमति दी गई है। प्रत्येक केंद्र पर पर्याप्त बारदाने और जूट के साथ-साथ PP/HDP बैग्स की व्यवस्था की गई है। उपार्जित गेहूँ के सुरक्षित भंडारण के लिए भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि फसल खराब न हो।

बुनियादी ढांचे में सुधार के तहत जिलों को तौल कांटों की संख्या में वृद्धि करने के अधिकार दिए गए हैं ताकि केंद्रों पर भीड़ जमा न हो। इसके साथ ही, तकनीकी सुचारुता के लिए सर्वर अपग्रेड किए गए हैं। उपार्जन केंद्रों पर हम्माल, तुलावटी, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की सफाई के लिए पंखा-छन्ना जैसी मशीनों की उपलब्धता अनिवार्य की गई है। सरकार द्वारा किसानों को उनकी उपज का 2625 रुपये प्रति क्विंटल (समर्थन मूल्य + बोनस) की दर से लाभकारी मूल्य दिया जा रहा है।

केंद्रों पर आने वाले किसानों ने सरकारी प्रबंधों की सराहना की है। ग्राम पंचायत मानपुरा के किसान गोपाल सिंह ने बताया कि सायलो और उपार्जन केंद्रों पर टेंट, छाया और शीतल पेयजल जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। वहीं, किसान रामचरण अन्ना ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि केंद्रों पर त्वरित कार्य हो रहा है और मात्र 10 मिनट में उनकी ट्रॉली खाली हो गई। शासन द्वारा इन सभी सुविधाओं की रियल-टाइम मॉनीटरिंग की जा रही है ताकि खरीदी प्रक्रिया के अंतिम दिन तक किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

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