कान्हा टाइगर रिजर्व की संरक्षण पद्धतियों को अपनाएगा मलेशिया, सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने लिया प्रशिक्षण

मध्य प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व में संचालित वन्यजीव संरक्षण के मॉडल अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ रहे हैं। हाल ही में मलेशियाई वन विभाग का एक सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल तीन दिवसीय अध्ययन प्रवास पर कान्हा पहुँचा। इस दौरान विदेशी दल ने यहाँ के सफल संरक्षण प्रयासों की न केवल प्रशंसा की, बल्कि इन मॉडलों को अपने देश में भी लागू करने की गहरी रुचि दिखाई। फील्ड भ्रमण के दौरान विशेषज्ञों ने भारतीय वन प्रबंधन की बारीकियों को समझा।
प्रतिनिधिमंडल के इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (एपीसीसीएफ) श्री एल. कृष्णमूर्ति और फील्ड डायरेक्टर श्री रवीन्द्र मणि त्रिपाठी ने दल की अगुवाई की। मलेशियाई अधिकारियों को कान्हा में अनाथ बाघ शावकों के पुनर्वास की जटिल प्रक्रिया, वन क्षेत्रों से ग्रामों के सफल पुनर्स्थापन और पर्यावरण अनुकूल पर्यटन प्रबंधन की गतिविधियों का जमीनी अवलोकन कराया गया। अधिकारियों ने बताया कि किस प्रकार स्थानीय समुदायों के सहयोग से वन्यजीवों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा रहा है।
भ्रमण के पहले दिन खटिया ईको सेंटर में एक विशेष तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में वन्यजीव प्रबंधन की आधुनिक रणनीतियों, संरक्षण के तौर-तरीकों और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से विमर्श हुआ। चर्चा के दौरान डॉ. एच.एस. नेगी (अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक), श्री एल. कृष्णमूर्ति और श्री रवीन्द्र मणि त्रिपाठी सहित अन्य वरिष्ठ विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
विशेषज्ञों ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से कान्हा टाइगर रिजर्व की उन श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को साझा किया, जिन्होंने इस पार्क को दुनिया के बेहतरीन बाघ अभयारण्यों की श्रेणी में खड़ा किया है। मलेशियाई दल ने यहाँ की प्रबंधन पद्धतियों और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण को अपने देश के जंगलों के लिए एक आदर्श उदाहरण माना। तीन दिनों के इस अध्ययन भ्रमण का उद्देश्य दोनों देशों के बीच वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में ज्ञान और अनुभवों का आदान-प्रदान करना रहा।


