कटनी बनेगा देश की ‘माइनिंग कैपिटल’, स्वर्ण अयस्क और डोलोमाइट के विशाल भंडारों के साथ औद्योगिक क्रांति की तैयारी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व और निरंतर निगरानी के चलते मध्य प्रदेश का कटनी जिला अब देश के मानचित्र पर एक प्रमुख खनिज एवं औद्योगिक केंद्र के रूप में अपनी नई पहचान बना रहा है। चूना पत्थर, बॉक्साइट और लौह अयस्क जैसी संपदा के बाद अब कटनी स्वर्ण अयस्क और डोलोमाइट के बड़े भंडारों के खनन के लिए पूरी तरह तैयार है। राज्य सरकार ने बड़ेरा और बचरबाड़ा क्षेत्र में 50 हेक्टेयर से अधिक के तीन डोलोमाइट ब्लॉक्स को माइनिंग कॉर्पोरेशन के लिए आरक्षित किया है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और औद्योगिक विकास को अभूतपूर्व गति मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कटनी के भविष्य को लेकर अपनी दूरगामी सोच साझा करते हुए कहा कि यह जिला अब केवल ‘चूना नगरी’ तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार इसे खनिज आधारित औद्योगिक विकास और आधुनिक खनन प्रबंधन के एक राष्ट्रीय मॉडल के रूप में विकसित कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि पारदर्शी और वैज्ञानिक उत्खनन के माध्यम से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जाएगा। कटनी अब तेजी से मध्य प्रदेश की ‘माइनिंग कैपिटल’ बनने की ओर अग्रसर है।
विशेष रूप से, मुख्यमंत्री ने कटनी को ‘कनकपुरी’ यानी ‘स्वर्ण नगरी’ के रूप में स्थापित करने की परिकल्पना की है। स्लीमनाबाद तहसील के इमलिया गांव (सुनाही) में लगभग 3.35 लाख टन स्वर्ण अयस्क मिलने का अनुमान है। यह सफलता वर्ष 1974 से शुरू हुए लंबे भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षणों का परिणाम है, जिसे अब वर्ष 2025-26 में अंतिम रूप दिया गया है। इमलिया क्षेत्र में सोने के साथ-साथ तांबा, चांदी, जिंक और लेड जैसे बहुमूल्य खनिजों की मौजूदगी ने इस क्षेत्र की आर्थिक महत्ता को वैश्विक स्तर पर बढ़ा दिया है।
इस स्वर्ण अयस्क क्षेत्र के विकास के लिए मुंबई की ‘प्रॉस्पेक्ट रिसोर्स मिनरल प्राइवेट लिमिटेड’ ने 121 करोड़ रुपये से अधिक की बोली लगाकर 50 वर्षों की माइनिंग लीज प्राप्त की है। लगभग 6.5 हेक्टेयर में होने वाली इन गतिविधियों से न केवल निवेश बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं और श्रमिकों के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के हजारों अवसर पैदा होंगे। अगस्त 2025 में आयोजित ‘माइनिंग कॉन्क्लेव 2.0’ की सफलता ने भी कटनी के लिए 56,414 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों का मार्ग प्रशस्त किया है।
सुशासन और तकनीक के समन्वय से जिले के खनिज राजस्व में भी भारी उछाल आया है। वार्षिक आय 100 करोड़ रुपये से बढ़कर अब 160 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है। प्रशासन ने अवैध उत्खनन को रोकने के लिए ई-चेक गेट और माइनिंग सर्विलांस सिस्टम जैसे आधुनिक सुरक्षा उपाय लागू किए हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, औद्योगिक विस्तार के साथ-साथ सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है ताकि कटनी की यह प्रगति आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश के निर्माण में मील का पत्थर साबित हो।


