मध्य प्रदेश में जनगणना 2027 का पहला चरण शुरू, नोडल अधिकारी ने नागरिकों से स्व-गणना आईडी साझा करने की अपील की

मध्य प्रदेश में जनगणना 2027 के पहले चरण के तहत मकानों की सूची तैयार करने और उनकी गणना का मैदानी कार्य 1 मई 2026 से शुरू हो चुका है, जो 30 मई 2026 तक जारी रहेगा। इस राष्ट्रीय महत्व के अभियान के अंतर्गत पूरे राज्य में प्रगणक (गणनाकता) घर-घर जाकर हर मकान और परिवार से संबंधित आंकड़े डिजिटल माध्यम से एकत्र कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में प्रदेश की जनता बढ़-चढ़कर अपना सहयोग दे रही है और अभियान में अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज करा रही है।

इस बीच फील्ड वर्क के दौरान यह बात सामने आई है कि जिन नागरिकों ने खुद से अपनी ऑनलाइन गणना (स्व-गणना) की प्रक्रिया पूरी कर ली है, वे प्रगणकों के घर पहुंचने पर उनके साथ अपनी ‘स्व-गणना आईडी’ साझा करने में हिचकिचा रहे हैं। इस विषय को गंभीरता से लेते हुए गृह विभाग की सचिव और राज्य की जनगणना नोडल अधिकारी श्रीमती शिल्पा गुप्ता ने प्रदेशवासियों से विशेष आग्रह किया है। उन्होंने कहा है कि यदि किसी परिवार ने स्व-गणना का काम पहले ही कर लिया है, तो वे प्रगणक के मांगने पर अपनी आईडी बिना किसी संकोच के जरूर दें, ताकि उनके समय की बचत हो सके और परिवार की बिल्कुल सही जानकारी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो जाए।

श्रीमती शिल्पा गुप्ता ने जनता से अपील की है कि वे सही और पूरी जानकारी उपलब्ध कराकर देश के इस ऐतिहासिक कार्य में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने डिजिटल माध्यम से अपनी स्व-गणना नहीं की है, वे घर आने वाले सरकारी प्रगणकों को स्पष्ट और सटीक विवरण दें। सुरक्षा और प्रामाणिकता के लिहाज से आम नागरिक प्रगणक के पास उपलब्ध अधिकृत पहचान पत्र की जांच कर सकते हैं, जिसे संबंधित चार्ज अधिकारी द्वारा जारी किया जाता है। पहचान पत्र देखकर कोई भी व्यक्ति प्रगणक की सत्यता सुनिश्चित कर सकता है।

नागरिकों की गोपनीयता को लेकर सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान जुटाए गए सभी आंकड़े जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 15 के प्रावधानों के तहत पूरी तरह सुरक्षित और गुप्त रखे जाते हैं। इस डेटा का इस्तेमाल किसी भी नागरिक के खिलाफ किसी भी कानूनी मामले में सबूत के तौर पर नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही, इस प्रक्रिया में दर्ज कराई गई जानकारियों के आधार पर किसी भी व्यक्ति को वर्तमान में मिल रहे सरकारी फायदों या योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं किया जाएगा, और न ही इसके आधार पर कोई नया लाभ दिया जाएगा।

प्रशासन के अनुसार, इस अभियान में एकत्र की जाने वाली व्यक्तिगत जानकारियों को सूचना के अधिकार (RTI) कानून के दायरे से भी बाहर रखा गया है, यानी इन्हें किसी के साथ साझा नहीं किया जा सकता। इन आंकड़ों का संकलन केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों और देश के विकास की योजनाएं बनाने के लिए किया जाता है। इसके विपरीत, जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 8 के तहत देश के हर नागरिक की यह कानूनी जिम्मेदारी है कि वह पूछे गए सवालों के सही जवाब दे। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत विवरण देता है या जानकारी देने से मना करता है, तो कानूनन उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

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