सरकारी गेहूं उपार्जन में तेजी: अब तक 18,707 करोड़ का भुगतान, खरीद केंद्रों पर रात 10 बजे तक कटेगी तौल पर्ची

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मामलों के कैबिनेट मंत्री श्री गोविन्द सिंह राजपूत ने सरकारी खरीद की प्रगति रिपोर्ट जारी करते हुए घोषणा की है कि प्रदेश में अब तक 12 लाख 30 हजार 426 पंजीकृत किसानों से 90 लाख 8 हजार 469 मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है। किसानों को राहत देने और खरीद केंद्रों पर सुगमता बनाए रखने के उद्देश्य से प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। अब केंद्रों पर तौल पर्ची तैयार करने का समय बढ़ाकर रात 10 बजे तक कर दिया गया है, जबकि अंतिम बिल (देयक) मध्यरात्रि 12 बजे तक जारी किए जा सकेंगे। वर्तमान में यह उपार्जन व्यवस्था हफ्ते में 6 दिन (सोमवार से लेकर शनिवार तक) संचालित की जा रही है।
आर्थिक लेनदेन और लॉजिस्टिक्स की जानकारी देते हुए मंत्री ने बताया कि अब तक बेचे गए अनाज के बदले किसानों को 18 हजार 707 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान किया जा चुका है। केंद्रों पर अनाज का अंबार न लगे, इसके लिए परिवहन व्यवस्था को मजबूत किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप खरीदे गए गेहूं में से 78 लाख 52 हजार 546 मीट्रिक टन का उठाव और परिवहन किया जा चुका है। वित्तीय लाभों का जिक्र करते हुए उन्होंने साफ किया कि किसानों को केंद्र सरकार के 2585 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य के ऊपर राज्य सरकार की तरफ से 40 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस दिया जा रहा है, जिससे उन्हें कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है।
आगामी योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए मंत्री श्री राजपूत ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में चल रहा गेहूं उपार्जन अभियान 23 मई 2026 तक संचालित होता रहेगा। किसान हित में किए गए नए फैसलों के तहत प्रत्येक उपार्जन केंद्र पर भौतिक रूप से मौजूद तौल कांटों की संख्या को 4 से बढ़ाकर सीधे 6 कर दिया गया है। सरकार ने जिला प्रशासन को स्वायत्तता देते हुए यह भी निर्णय लिया है कि स्थानीय जरूरतों के अनुसार जिले खुद भी तौल कांटों की संख्या बढ़ाने का फैसला ले सकते हैं। पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने और गड़बड़ियों को रोकने के लिए खाद्य विभाग द्वारा हर घंटे उपार्जन के आंकड़ों की बारीकी से निगरानी की जा रही है।


