मध्य प्रदेश में पुलिसकर्मियों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा योजना होगी और अधिक प्रभावी, डीजीपी कैलाश मकवाणा की बैठक में अहम प्रस्तावों को मंजूरी

मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाणा की अध्यक्षता में हाल ही में मध्य प्रदेश पुलिस स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएचपीएस) के न्यासी मंडल की एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पुलिस बल के जवानों और उनके आश्रित परिजनों को मिलने वाली चिकित्सा सुविधाओं को पहले से ज्यादा सुगम, व्यापक और कल्याणकारी बनाना है। बैठक के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार से जुड़े कई नीतिगत प्रस्तावों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

अधिकारियों को संबोधित करते हुए पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा कि हमारे पुलिसकर्मी दिन-रात आम जनता की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को बनाए रखने में जुटे रहते हैं। ऐसी स्थिति में उनके और उनके परिवार के स्वास्थ्य का ध्यान रखना महकमे की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। डीजीपी ने विशेष परिस्थितियों में मानवीय आधार पर फैसले लेने के लिए विशेषाधिकार की आवश्यकता जताई। इसके साथ ही उन्होंने सभी विंग प्रमुखों को आदेश दिए कि चिकित्सा प्रतिपूर्ति (मेडिकल रीइंबर्समेंट) और इलाज से जुड़े जितने भी बिल पेंडिंग हैं, उनका निपटारा तुरंत किया जाए।

इस बैठक में स्वास्थ्य योजना को मौजूदा वक्त की जरूरतों के हिसाब से अधिक संवेदनशील और व्यावहारिक बनाने की रणनीति तैयार की गई। चर्चा के दौरान परिजनों की पात्रता, कैशलेस इलाज के दायरे, गंभीर बीमारियों की चिकित्सा और इमरजेंसी में मिलने वाली राहत जैसे अहम बिंदुओं पर मंथन हुआ। इसके अलावा, एक संवेदनशील फैसला लेते हुए तय किया गया कि अनुकंपा नियुक्ति पाने वाले उन पुलिसकर्मियों के छोटे भाई-बहनों और दिव्यांग आश्रितों को भी योजना में शामिल करने के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा, जिन पर अपने परिवार के पालन-पोषण का जिम्मा है।

पुलिसकर्मियों को अपने स्थानीय क्षेत्र में ही कैशलेस इलाज की बेहतर सुविधा मिल सके, इसके लिए राज्य के अधिक से अधिक मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों को इस योजना से जोड़ने की बात कही गई। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश के 55 और राज्य के बाहर के 4 अस्पतालों को मिलाकर कुल 59 निजी चिकित्सालय इस योजना के तहत अनुबंधित हैं। डीजीपी ने सभी यूनिट प्रमुखों को निर्देश दिए कि वे स्थानीय स्तर पर सूचिबद्ध होने योग्य अस्पतालों से संपर्क साधकर नए प्रस्ताव मुख्यालय भेजें।

जवानों के हित में एक और बड़ा फैसला लेते हुए तय किया गया कि यदि दिल का दौरा पड़ने या गंभीर सड़क हादसे जैसी आपातकालीन स्थिति में किसी गैर-अनुबंधित अस्पताल में इलाज शुरू करना पड़ता है, तो मरीज की स्थिति सामान्य होने तक वहां कैशलेस उपचार की सुविधा दी जाएगी। इसके साथ ही ड्यूटी के दौरान हिंसा में घायल होने, सरकारी या किराए के पुलिस वाहन की दुर्घटना का शिकार होने वाले कर्मियों और कैंसर, किडनी-लिवर ट्रांसप्लांट जैसी गंभीर बीमारियों के मामलों में मेडिकल रीइंबर्समेंट के बाद बची हुई पूरी राशि का भुगतान पीएचपीएस फंड से करने का निर्णय लिया गया। अब कोमा और पैरालिसिस की स्थिति में भी मदद मिलेगी, जिसके तहत अंतर राशि की सीमा को 50 फीसदी से बढ़ाकर शत-प्रतिशत करने का प्रस्ताव है, जिसकी अधिकतम सीमा 14 लाख रुपये तय की गई है।

इस महत्वपूर्ण बैठक में विभिन्न पुलिस इकाइयों से मिले सुझावों पर भी चर्चा की गई और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए गए। बैठक में विशेष पुलिस महानिदेशक आदर्श कटियार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ए. साईं मनोहर, योगेश चौधरी, सोलोमन यश कुमार मिंज, उप पुलिस महानिरीक्षक अवधेश गोस्वामी और वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. रूही चंद्र समेत विभाग के कई आला अधिकारी मौजूद रहे।

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