मध्य प्रदेश में पेयजल आपूर्ति मुख्यमंत्री की सर्वोच्च प्राथमिकता, मार्च 2028 तक हर घर नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) की समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि आम जनता को पर्याप्त और निर्बाध पेयजल की आपूर्ति करना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि गर्मी के मौसम और बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जलापूर्ति व्यवस्था की लगातार निगरानी की जाए। जहां भी पानी की कमी की स्थिति बन रही है, वहां तुरंत वैकल्पिक इंतजाम करके पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती सम्पत्तिया उइके ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि राज्य में ‘जल जीवन मिशन’ का 80 प्रतिशत कार्य संपन्न हो चुका है। उज्जैन राजस्व संभाग सहित मध्य प्रदेश के 11 जिलों में यह काम पूरी तरह से (100%) खत्म कर लिया गया है। विभाग अपने तय लक्ष्यों की तरफ तेजी से अग्रसर है और मार्च 2028 से पहले पूरे प्रदेश में हर घर तक नल से जल पहुंचाने का उद्देश्य प्राप्त कर लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने शत-प्रतिशत कार्य पूरा करने वाले गांवों और ग्राम पंचायतों को बेहतर संचालन के लिए पुरस्कृत और सम्मानित करने के निर्देश दिए हैं।

समीक्षा के दौरान मंत्री श्रीमती उइके ने बताया कि खुले बोरवेल के कारण होने वाले हादसों और मौतों को रोकने के लिए मध्य प्रदेश ने ‘बोरवेल अधिनियम’ लागू किया है, और ऐसा कानून बनाने वाला वह देश का पहला राज्य बन गया है। उन्होंने विभाग को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए इसके सिविल विंग, मैकेनिकल विंग और जल निगम का विलय करने का सुझाव दिया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने बताया कि ‘जल गंगा संवर्धन अभियान-2026’ के अंतर्गत डिंडोरी और मंडला जिलों में 8 हजार से अधिक एकल ग्राम नल जल योजनाओं का काम पूरा किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए इसे ‘कर्म स्थान से जन्म स्थान की ओर’ की सोच से जोड़ने को कहा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास और जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय से तत्काल संपर्क साधें। केंद्र सरकार से राज्य को जल जीवन मिशन के तहत करीब 5 हजार करोड़ रुपये का आवंटन मिलना है, जिसके लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सीआर पाटिल ने अपनी मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने एक ऐसा मैकेनिज्म तैयार करने को कहा जिससे सभी योजनाएं बिना किसी रुकावट के चलती रहें। जल संरक्षण करने वाले लोगों को राज्य और जिला स्तर पर सम्मानित करने के लिए ‘जल महोत्सव’ को ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ से जोड़ने के निर्देश दिए गए। वर्तमान में इस अभियान के तहत पानी की जांच, हैंडपंपों की मरम्मत और ऑपरेटर्स को ट्रेनिंग देने का काम किया जा रहा है।

जल स्रोतों के स्थायित्व पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग को सिर्फ ट्यूबवेल जैसे माध्यमों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। जल स्तर सुधारने और वॉटर रिचार्जिंग के लिए तालाबों तथा सरोवरों का निर्माण किया जाना चाहिए। इस कार्य में मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (मैपकास्ट) की तकनीकी मदद लेने की सलाह दी गई।

बैठक में विभाग के प्रमुख सचिव श्री मनीष सिंह ने बताया कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जलापूर्ति की कड़ी निगरानी की जा रही है। शिकायत मिलते ही तुरंत सुधार किया जाता है और पीने के पानी का व्यावसायिक या निर्माण कार्यों में उपयोग करने वालों पर सख्ती की जा रही है। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2023 से अब तक राज्य में 16.50 लाख से ज्यादा घरेलू नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं और 15,238 नए नलकूप व हैंडपंप लगाए गए हैं। अब तक 14,200 गांवों को पूरी तरह ‘हर घर जल’ घोषित किया जा चुका है। प्रदेश के लगभग 75% यानी 1 करोड़ 11 लाख से अधिक परिवारों को नल से पानी मिल रहा है। इसके अलावा, मध्य प्रदेश जल निगम द्वारा बिजली खर्च कम करने के लिए सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना की जा रही है।

मध्य प्रदेश जल निगम के प्रबंध संचालक श्री वी.एस. कोलसानी ने जानकारी दी कि उज्जैन संभाग की सभी एकल ग्राम नल जल योजनाओं का काम पूरा हो चुका है, जिससे 7 लाख 9 हजार 65 परिवारों को नल कनेक्शन मिले हैं। राज्य की 155 लैब्स को NABL प्रमाणन मिल चुका है। साथ ही, उपभोक्ताओं की समस्याओं के समाधान के लिए ‘जल दर्पण’ ऑनलाइन पोर्टल बनाया गया है। वर्ष 2026-27 के बजट में मुख्य विकास योजनाओं के लिए 5 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। आगामी समय के लिए जल जीवन मिशन 2.0 की तैयारियां जारी हैं और रिक्त पदों पर भर्तियां की जा रही हैं। उन्होंने सेवाओं में सुधार के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग, आईओटी (IoT) सेंसर्स लगाने और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की स्थापना का प्रस्ताव रखा और बताया कि अक्टूबर 2026 में ‘जल उत्सव’ मनाया जाएगा।

इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) श्री नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव (वित्त) श्री मनीष रस्तोगी समेत कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे।

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