कूनो अभ्यारण्य में दिखा अत्यंत दुर्लभ वन्यजीव कैराकल, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सरकार के संरक्षण प्रयासों को सराहा

श्योपुर के प्रसिद्ध कूनो नेशनल पार्क में कई दशकों के लंबे इंतजार के बाद दुर्लभ प्रजाति की जंगली बिल्ली ‘कैराकल’ की दस्तक देखी गई है, जिस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हर्ष प्रकट किया है। कूनो वन क्षेत्र में वन्यप्राणियों की निगरानी के लिए लगाए गए कैमरा ट्रैप के सर्वे में इस दुर्लभ बिल्ली की तस्वीरें सामने आई हैं। वन विभाग के मुताबिक, इन तस्वीरों से यह साफ हो गया है कि अनुकूल वातावरण मिलने के कारण कैराकल ने कूनो के जंगलों में दोबारा अपना बसेरा बना लिया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस विषय पर बयान जारी करते हुए कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर हमें पर्यावरण के संरक्षण और प्राकृतिक संतुलन की अहमियत को समझना होगा। कूनो अंचल में दुर्लभ कैराकल का फिर से दिखाई देना यह साबित करता है कि वहां का पारिस्थितिकी तंत्र अब वन्यजीवों के लिए बेहद समृद्ध और अनुकूल हो चुका है। उन्होंने कहा कि यह कामयाबी कूनो नेशनल पार्क में वन्य प्राणियों की सुरक्षा और उनके विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा ईमानदारी से की जा रही कोशिशों पर मुहर लगाती है।
प्रोजेक्ट चीता का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच और मार्गदर्शन के चलते मध्य प्रदेश में इस बड़े प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारा गया है, जिससे वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में राज्य का गौरव बढ़ा है। इस परियोजना का व्यापक उद्देश्य बताते हुए उन्होंने कहा कि इसका काम महज चीतों की प्रजाति को पुनर्स्थापित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य ध्येय पूरे ईकोसिस्टम को सुदृढ़ बनाना है। इसी योजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश के वनों को संरक्षित करने और विलुप्त होने की कगार पर खड़े जीवों की संख्या में वृद्धि करने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, जंगलों में जीवों के रहने के लिए सुरक्षित और बेहतर माहौल तैयार करने की दिशा में राज्य सरकार लगातार नए प्रयास कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि कूनो नेशनल पार्क वर्तमान में जीव संरक्षण की दिशा में देश के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरा है। चीता प्रोजेक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन की बदौलत ही आज कूनो को देश और दुनिया भर में लगातार सुर्खियां और सराहना मिल रही हैं।


