मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा: रोजगारपरक कोर्सेज और शिफ्ट व्यवस्था पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का विशेष जोर

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को मंत्रालय में आयोजित उच्च शिक्षा विभाग के कार्यों की समीक्षा के दौरान राज्य में शैक्षणिक ढांचे को अधिक व्यावहारिक और आधुनिक बनाने की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि घने रिहायशी इलाकों के कॉलेजों में छात्रों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुबह और शाम की पारियों (शिफ्ट व्यवस्था) में कक्षाएं चलाने की योजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय स्तर की ‘नैक’ संस्था की तर्ज पर प्रदेश में ‘सैक’ (राज्य परिषद) के गठन की आधिकारिक कार्रवाई जल्द से जल्द शुरू करने के आदेश दिए, ताकि राज्य के भीतर ही कॉलेजों की गुणवत्ता का सटीक मूल्यांकन हो सके।
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री ने आने वाले साल को ‘युवा वर्ष’ के तौर पर रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि छात्र कल्याण को ध्यान में रखते हुए विभिन्न विभागों के समन्वय से नए प्रकल्प लागू किए जाएं। उन्होंने रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए 12वीं उत्तीर्ण करने वाले छात्र-छात्राओं के लिए उचित काउंसिलिंग व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।
प्रशासनिक अधिकारियों ने बैठक में मुख्यमंत्री को विभाग की हालिया उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी दी। आंकड़ों के मुताबिक, नेशनल लॉ इंस्टीट्यूशन यूनिवर्सिटी (NLIU) ने देश में 27वीं और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) इंदौर ने 49वीं रैंक हासिल की है, जबकि तीन अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों को भी एनआईआरएफ (NIRF) द्वारा सराहा गया है। इसके अलावा गुणा, खरगोन और सागर में नए विश्वविद्यालयों की स्थापना तथा आगर मालवा में नए लॉ कॉलेज की शुरुआत की जा चुकी है। 55 शासकीय कॉलेजों को प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के रूप में अपग्रेड किया गया है।
नवाचारों और डिजिटल गवर्नेंस के मोर्चे पर विभाग ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। आईआईटी दिल्ली के तकनीकी सहयोग से प्रदेश के 68 महाविद्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कोर्स संचालित किए जा रहे हैं। एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स की बारीकियां सिखाने के लिए राज्य के 8 कॉलेजों में एवीजीसी (AVGC) लैब स्थापित की जा रही है। उपस्थिति और प्रवेश प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने के लिए ‘सार्थक ऐप’, ‘ई-प्रवेश मोबाइल ऐप’ और ‘समर्थ सॉफ्टवेयर’ का उपयोग किया जा रहा है।
बैठक के अंत में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुछ प्रमुख नीतिगत निर्देश जारी किए, जिन्हें तत्काल प्रभाव से क्रियान्वित किया जाना है:
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महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में केवल पारंपरिक शिक्षा के बजाय पूरी तरह से रोजगारपरक और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के संचालन पर ध्यान केंद्रित किया जाए।
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शैक्षणिक स्थलों की कमी को दूर करने के लिए जरूरत पड़ने पर सांदीपनि विद्यालयों के भवनों का उपयोग कॉलेज संचालन के लिए किया जाए।
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खाद्य प्रसंस्करण, आर्किटेक्चर, कृषि विज्ञान और अन्य वोकेशनल विषयों की पढ़ाई के लिए महाविद्यालयों में बुनियादी ढांचा और आवश्यक व्यवस्थाएं अविलंब सुदृढ़ की जाएं।



