पीएम आवास के बाहर विपक्षी सांसदों के अनधिकृत प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग, देशभर के अधिवक्ताओं ने CJI को सौंपा पत्र

21 जुलाई को दिल्ली में प्रधानमंत्री के आधिकारिक निवास के बाहर विपक्षी सांसदों द्वारा आयोजित अनधिकृत विरोध प्रदर्शन के विरोध में देशभर के सैकड़ों वकीलों ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है। अधिवक्ताओं के एक समूह ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को एक संयुक्त पत्र भेजकर इस पूरे घटनाक्रम पर स्वतः संज्ञान लेने और उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्रों में बिना अनुमति होने वाले प्रदर्शनों को रोकने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।
इस विवाद की शुरुआत 21 जुलाई को हुई, जब जंतर-मंतर पर छात्रों के मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज के विरोध में विपक्षी सांसदों ने मोर्चा खोला। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई प्रमुख विपक्षी नेता बिना पूर्व अनुमति के प्रधानमंत्री आवास के बाहर एकत्र हो गए। प्रदर्शनकारी नेताओं ने इस दौरान प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग की।
स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया था। इसी बीच केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और उन्होंने राहुल गांधी से मुलाकात कर धरना समाप्त करने की अपील की। दोनों नेताओं के बीच कुछ समय तक इस विषय पर बातचीत भी हुई।
उसी दिन अधिवक्ताओं ने मुख्य न्यायाधीश को अपना प्रतिवेदन सौंपा, जिसमें उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री निवास राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील स्थान है। ऐसे अति-सुरक्षित क्षेत्र में बिना किसी पूर्व अनुमति के प्रदर्शन आयोजित करना सुरक्षा व्यवस्था, सार्वजनिक व्यवस्था और कानून के शासन पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
पत्र में वकीलों ने स्पष्ट किया है कि यद्यपि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराना एक संवैधानिक अधिकार है, परंतु इस अधिकार का प्रयोग संविधान और विधि की सीमाओं के भीतर ही होना चाहिए, विशेषकर तब जब मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े स्थलों का हो। अधिवक्ताओं ने CJI से इस घटना पर संज्ञान लेने, मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता तय करने और भविष्य में अति-सुरक्षित क्षेत्रों में ऐसे अनधिकृत प्रदर्शनों की पुनरावृत्ति रोकने हेतु स्पष्ट गाइडलाइंस जारी करने की मांग की है।


