मोहन कैबिनेट की बैठक में कई अहम फैसलों पर मुहर: लाड़ली बहना, स्वास्थ्य और अनुसंधान के लिए खुले खजाने; नर्मदा संरक्षण हेतु बनेगा नया प्राधिकरण

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मंगलवार को भोपाल स्थित मंत्रालय में संपन्न हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में राज्य के बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाओं, कृषि शिक्षा और महिला सशक्तिकरण को नई गति देने वाले कई दूरगामी निर्णय लिए गए। बैठक में विभिन्न सामाजिक सुरक्षा और विकासात्मक योजनाओं को आगामी वर्षों में सुचारू रूप से जारी रखने के लिए करीब 1.46 लाख करोड़ रुपये की विशाल वित्तीय राशि को औपचारिक मंजूरी प्रदान की गई।

नर्मदा नदी के संरक्षण और उसके पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्जीवन को संस्थागत रूप देने के लिए ‘निर्मल एवं अविरल माँ नर्मदा मिशन’ (नमन मिशन) स्थापित करने का संकल्प पारित किया गया। राज्य की एक-तिहाई जनता की निर्भरता को देखते हुए इस मिशन को म.प्र. सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1973 के तहत एक स्वायत्त संस्था बनाया जाएगा। इसकी त्रि-स्तरीय व्यवस्था में मुख्यमंत्री साधारण सभा के प्रमुख होंगे, जबकि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कार्यकारी समिति दैनिक व रणनीतिक दायित्व संभालेगी। मिशन के संचालन हेतु वार्षिक 100 करोड़ रुपये राज्य अनुदान, 100 करोड़ रुपये कैम्पा मद से और पांच वर्षों के लिए 100 करोड़ रुपये आकस्मिक बजट से दिए जाएंगे। इसके साथ ही नदी तंत्र की आधुनिक निगरानी के लिए एआई, रिमोट सेंसिंग और डेटा एनालिटिक्स से लैस एक प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट बनाई जाएगी।

सामाजिक कल्याण के मोर्चे पर सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के लिए महिला-केंद्रित योजनाओं की वित्तीय निरंतरता सुनिश्चित की है। प्रदेश की 1.27 करोड़ पात्र महिलाओं को 1500 रुपये मासिक सहायता देने वाली ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ के लिए 1,14,365 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। बालिकाओं के शैक्षणिक और आर्थिक संबल के लिए संचालित ‘लाड़ली लक्ष्मी योजना’ को 16,326.47 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसके तहत विभिन्न कक्षाओं में प्रवेश और 21 वर्ष पूर्ण होने पर चरणबद्ध वित्तीय लाभ दिया जाता है। इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं की मजदूरी क्षतिपूर्ति और कन्या जन्म को बढ़ावा देने वाली ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ के क्रियान्वयन हेतु 2,137.65 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।

राज्य की स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूती देने के लिए मंत्रि-परिषद ने 11,835.35 करोड़ रुपये का बड़ा बजट आवंटित किया है। इस राशि से उप स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला चिकित्सालयों के भवनों का निर्माण (₹3,219.22 करोड़), जीवनरक्षक आधुनिक उपकरणों की खरीद (₹518.93 करोड़) और उप स्वास्थ्य केंद्र संवर्ग के वेतन (₹4,742.45 करोड़) का प्रबंध होगा। प्रदेश में जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा रहीं 71 हजार आशा कार्यकर्ताओं और 5,200 आशा पर्यवेक्षकों के प्रोत्साहन भत्तों के लिए 3,354.75 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण के प्रसार और कृषि शोध को बढ़ावा देने के क्रम में 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की योजनाओं को 734 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जिसमें नवाचार, पेटेंट, जीआईएस तथा ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल लैब और विज्ञान मेलों का संचालन शामिल है। कृषि क्षेत्र में जबलपुर और ग्वालियर कृषि विश्वविद्यालयों के संचालन, पेंशन दायित्वों व अधोसंरचना के लिए 870.16 करोड़ रुपये की निरंतरता को हरी झंडी दी गई। प्रशासनिक मोर्चे पर मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम में 35 नवीन पदों की मंजूरी और 7 मौजूदा पदों को 18 सितंबर 2031 तक विस्तार दिया गया है, जिसका 4.12 करोड़ रुपये का वार्षिक खर्च निगम अपने आंतरिक स्रोतों से पूरा करेगा।

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