एमपी और यूपी के बीच बिजली खरीद और पावर बैंकिंग पर ऐतिहासिक समझौता, 14 हजार करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के ऊर्जा विभागों के बीच एक रणनीतिक समझौता संपन्न हुआ है, जिसका लक्ष्य बिजली उत्पादन परिसंपत्तियों का बेहतर इस्तेमाल और महंगी बिजली खरीद पर लगाम लगाना है। एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (MPPMCL) और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने पूरक बिजली खरीद और फर्म पावर बैंकिंग की रूपरेखा तैयार करते हुए एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
एमओयू पर एमपीपीएमसीएल के मुख्य महाप्रबंधक (गैर-पारंपरिक ऊर्जा) जी.एस. खनूजा और यूपीपीसीएल के निदेशक (प्लानिंग) दीपक रैजादा ने दस्तखत किए। इस योजना के तहत दोनों राज्य मिलकर 2000 मेगावाट पीक पावर की खरीद के लिए प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया शुरू करने जा रहे हैं।
यह साझेदारी दोनों पड़ोसी राज्यों के विशिष्ट मांग चक्रों के समन्वय पर टिकी है। जहां उत्तर प्रदेश को मई से सितंबर के महीनों में गर्मी और खरीफ फसलों के लिए अत्यधिक बिजली की जरूरत होती है, वहीं मध्य प्रदेश में अक्टूबर से मार्च के दौरान रबी सिंचाई के चलते बिजली की मांग चरम पर पहुंचती है। दोनों राज्यों की इस पूरक प्रकृति के चलते अतिरिक्त बिजली को जरूरत के अनुसार एक-दूसरे को हस्तांतरित किया जा सकेगा।
दीर्घकालिक फर्म पावर बैंकिंग व्यवस्था लागू होने से बिजली संयंत्रों की क्षमता का पूर्ण इस्तेमाल होगा और संसाधनों की बर्बादी रुकेगी। साथ ही, चरम मांग के समय दोनों राज्यों को महंगे अल्पकालिक बाजार पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जिससे ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति की स्थिरता दोनों में सुधार होगा।
इस व्यापक पहल के माध्यम से बिजली और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में लगभग 14,000 करोड़ रुपये का निवेश आने की उम्मीद है, जो नई ऊर्जा परियोजनाओं और रोजगार सृजन को रफ्तार देगा। बिजली खरीद का खर्च कम होने का सीधा लाभ आम उपभोक्ताओं को सस्ती और भरोसेमंद बिजली के रूप में मिलेगा। राष्ट्रीय ऊर्जा लक्ष्यों के अनुरूप यह मॉडल अन्य राज्यों के बीच भी विद्युत समन्वय की नई राह दिखाएगा।



