बलराम कृषि महोत्सव: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बोले- कृषि बनेगी प्रदेश की समृद्धि का मजबूत आधार, किसान अपनी कीमती जमीन न बेचें

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भिंड जिले में आयोजित ‘बलराम कृषि महोत्सव’ को संबोधित किया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि यह महोत्सव अन्नदाताओं की सेवा और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का पावन पर्व है। उन्होंने रेखांकित किया कि कभी बीहड़ और डकैत समस्या के लिए जाना जाने वाला भिंड आज अपनी पुरानी छवि से बाहर निकलकर उद्योग, रोजगार और उन्नत खेती के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है तथा ‘जय जवान-जय किसान’ के संकल्प को चरितार्थ कर रहा है।

संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में कृषि क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार और नागरिकों की आर्थिक संपन्नता की सबसे पुख्ता गारंटी सिद्ध होगा। किसानों से दुग्ध उत्पादन, मोटे अनाज (श्रीअन्न), मत्स्य पालन और उद्यानिकी जैसे क्षेत्रों में सक्रिय होने का आह्वान करते हुए उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार खेत से लेकर प्रसंस्करण इकाइयों (फैक्ट्री) तक अन्नदाताओं के साथ खड़ी है। भूमि के महत्व पर बल देते हुए उन्होंने किसानों को अपनी हीरे जैसी अमूल्य जमीन किसी भी परिस्थिति में न बेचने तथा अपनी नई पीढ़ी को इसी भूमि में कठोर परिश्रम और लगन के संस्कार रोपने की सीख दी।

मुख्यमंत्री ने जिले की कृषि प्रगति का ब्योरा देते हुए बताया कि चंबल, सिंध और पहुज नदियों से पोषित भिंड में गेहूं, बाजरा और विशेष रूप से सरसों की भरपूर पैदावार होती है। प्रदेश के कुल सरसों उत्पादन का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अकेले भिंड और मुरैना जिले से आता है। जिले में प्राकृतिक खेती के प्रति भी रुझान बढ़ा है, जहां 3 हजार से अधिक किसानों ने 1,250 हेक्टेयर क्षेत्र में इसका विस्तार किया है। इसके अलावा, प्रदेश में दुग्ध संकलन में 31 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। जिले की लगभग 60 गौशालाओं में सेवा कार्य जारी है और ग्राम पांडरी में 5 हजार बेसहारा गौवंश के लिए स्वावलंबी गौशाला तैयार की जा रही है। वहीं, ग्राम भवथरा में 25 लाख रुपये के निवेश से स्थापित आधुनिक मत्स्य पालन तकनीक के जरिए 8 मीट्रिक टन मछली उत्पादन दर्ज किया गया है।

सिंचाई परियोजनाओं पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) लिंक परियोजना से भिंड के कृषि परिदृश्य में बड़ा बदलाव आएगा। इसके साथ ही सिमार स्टॉप डैम का कार्य समापन की ओर है, जिससे 210 हेक्टेयर रकबा सिंचित होगा। अटेर क्षेत्र की कनेरा उद्वहन सिंचाई परियोजना जून 2027 तक पूरी कर ली जाएगी, जिससे 96 गांवों की 15 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि को पानी मिलेगा। वर्तमान में राजघाट, चंबल और हर्सी नहरों से जिले की 1 लाख 62 हजार 381 हेक्टेयर जमीन पहले से ही सिंचित हो रही है।

समारोह में उपस्थित नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री की पहल पर पूरे राज्य में उत्सवपूर्वक मनाया जा रहा यह महोत्सव कृषकों में नया उत्साह भर रहा है। कार्यक्रम के दौरान मंत्री शुक्ला और भिंड विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले कृषकों को शॉल व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इनमें दबोहामोड़ के रामसनेही शर्मा (फलोद्यान नर्सरी), बडेरा के पर्वत सिंह (नर्सरी), टुडिला के जगदीश सिंह कंषाना (प्राकृतिक खेती), मानगढ़ के रंजीत सिंह (जैविक खेती), बरूअनपुरा के गंगाराम बघेल (जैविक खेती), सोनेलाल का पुरा के अजय सिंह (केंचुआ खाद), उदन्नखेडा के लक्ष्मण सिंह नरवरिया (जैविक खेती), सैपुरा के संदीप सिंह (टमाटर-मिर्च उत्पादन), क्यारीपुरा के कुलदीप सिंह भदौरिया (जैविक खेती) और बड़ागांव नं. 1 के गुरुप्रसन्न राजावत (देशी बीज संरक्षण) शामिल हैं। साथ ही 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में श्रेष्ठ अंक हासिल करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं- निराली बघेल, कृतिका दुबे, प्रिंसी, साक्षी शर्मा, छवि परमार, सोनम देवी, साहिल यादव और अभय शर्मा को भी पुरस्कृत किया गया।

महोत्सव स्थल पर किसानों के लिए फार्मर आईडी, ई-केवाईसी और कृषक पंजीयन के विशेष सहायता केंद्र बनाए गए थे। कृषि, पशुपालन, डेयरी, उद्यानिकी, मत्स्य और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित भिंड द्वारा विभागीय योजनाओं की प्रदर्शनियां लगाई गईं, जबकि स्वसहायता समूहों ने अपने उत्पादों का विक्रय किया। इस मौके पर अपेक्स बैंक भोपाल के प्रशासक महेंद्र यादव, जनपद अध्यक्ष सरोज बघेल, कपिल यार्दे और देवेंद्र नरवरिया सहित स्थानीय कृषक मौजूद थे। जिले में ताईवानी अमरूद, हल्दी और जैविक खेती के सफल प्रयोगों के बेहतर परिणाम भी सामने आ रहे हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button