तकनीकी समझ और युवा सोच से शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दें अधिकारी: डॉ. मोहन यादव

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में इंदौर के सांदीपनि शासकीय अहिल्या आश्रम कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-1 में आयोजित राज्य स्तरीय संवाद कार्यक्रम में युवा शिक्षा अधिकारियों और शिक्षकों से सीधा संवाद किया। मुख्यमंत्री ने शैक्षणिक गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का आह्वान करते हुए सभी जिला अधिकारियों से न्यूनतम 90 प्रतिशत परीक्षा परिणाम का लक्ष्य तय कर कार्य करने को कहा। उन्होंने महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शिक्षक समुदाय को शुभकामनाएं दीं।

‘आज का युवा, भविष्य का निर्माता-एजुकेशन डायलॉग, बेहतर शिक्षा के नए विचार’ थीम पर केंद्रित इस आयोजन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे जिला शिक्षा अधिकारियों, जिला परियोजना समन्वयकों, विकासखंड शिक्षा अधिकारियों तथा शिक्षकों सहित 200 से अधिक प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से उनके नवाचारों और क्षेत्रीय चुनौतियों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को अपने जिलों की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों को समझकर परिणाम आधारित कार्यप्रणाली अपनानी चाहिए, ताकि स्थानीय स्तर पर तैयार समाधानों का लाभ पूरे प्रदेश को मिल सके।

प्रशासनिक पुनर्गठन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग में युवा अधिकारियों को मैदानी कमान दी गई है। राज्य में औसतन 28 वर्ष की आयु वाले लगभग 40 डीईओ, 23 डीपीसी और करीब 60 बीईओ नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग की तकनीकी दक्षता और नवाचारी दृष्टि व्यवस्था की बड़ी ताकत है। डिजिटल टूल्स और एआई के प्रभावी प्रयोग से शिक्षण पद्धति को अधिक व्यावहारिक बनाया जा सकता है, जिससे विद्यार्थियों में विषय की गहरी समझ और समस्या समाधान का कौशल विकसित हो।

मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि विद्यालय का कोई भी बच्चा शैक्षणिक रूप से उपेक्षित न रहे। शिक्षकों को छात्रों के साथ परिवार जैसा आत्मीय संबंध बनाना चाहिए और विशेष रूप से कक्षा 10वीं के उपरांत विद्यार्थियों को उपयुक्त अध्ययन क्षेत्र व कॅरियर चुनने में समुचित काउंसलिंग उपलब्ध करानी चाहिए। पारिवारिक या सामाजिक कारणों से पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों को ओपन स्कूल प्रणाली से जोड़ने और जरूरतमंद परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में शिक्षकों को सेतु की भूमिका निभानी होगी।

बुनियादी सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि बिना पक्के भवन वाले विद्यालयों को शीघ्र पक्के भवन उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि गणवेश, मध्यान्ह भोजन, साइकिल और परिवहन जैसी सुविधाएं विद्यार्थियों तक पहुंचाई जा रही हैं। उन्होंने समाज के प्रबुद्ध वर्ग और अभिभावकों से विद्यालयों के विकास में जनभागीदारी निभाने की अपील की।

संवाद के दौरान मैदानी नवाचारों को भी साझा किया गया। अशोकनगर में विद्यार्थियों की हाजिरी दर्ज करने और अनुपस्थिति पर परिजनों को ऑटोमेटेड कॉल भेजने वाले ‘रियाज’ ऐप तथा इंदौर के शासकीय स्कूलों में आईआईटी मद्रास के समन्वय से शुरू हुई एआई लैब की मुख्यमंत्री ने सराहना की। उन्होंने शिक्षकों को मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य के लिए योग अपनाने की सीख दी तथा हिंदी शब्दावली के संवर्धन में वीर सावरकर के योगदान को रेखांकित किया।

समारोह में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, स्थानीय सांसद, महापौर, क्षेत्रीय विधायकों सहित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी मौजूद थे। स्कूल शिक्षा विभाग के आयुक्त अभिषेक सिंह ने विभाग द्वारा संचालित गुणवत्ता सुधार अभियानों का संक्षिप्त प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

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