धार जिले के नर्मदा नगर व सीरवी समाज में शीतला सप्तमी के दिन मनाई जाती है होली

धार ‌
धार जिले के ग्राम नर्मदा नगर में संपूर्ण सीरवी समाज में वर्षों पुरानी परंपराओ को लेकर वर्तमान में भी उन्हीं के आधार पर सप्तमी को ग्रामीण होली का त्योहार मनाते हैं ग्राम नर्मदा नगर मां नर्मदा के तट के निकट धार जिले के अंतिम छोर पर स्थित है गांव के ग्रामीण आज भी बुजुर्गों के आदर्शों का पालन कर होली का त्योहार रंगपंचमी पर नहीं सप्तमी के दीन संपूर्ण ग्राम वासी मनाते हैं क्योंकि गांव में सीरवी समाज के लोग आधीक होने से समाज की परंपरा का पालन करते‌ हे व होली का त्यौहार मनाते हैं

 होली क्यों मनाते हैं

होली का त्योहार मनाने का कारण भक्त प्रल्हाद की भक्ति। हे यदि विष्णु की भक्ति नहीं करते तो आज हमारा देश होली नहीं मना पाता हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को विष्णु की भक्ति बंद नहीं करने पर अपनी बहन होलीका।कोआग मे जलने का वरदान विफल हो गया। प्रहलाद हरि कृपा से बच गए व होलीका का दहन हो गया इसी पौराणिक घटना को लेकर संपूर्ण देश प्रदेश में होली का त्योहार बड़ी धूमधाम के मनाया जाता है।

 इस तरह मनाते हैं होली

नर्मदा नगर में ग्रामीण अपने गिले-शिकवे भुलाकर एकता का संदेश देते हैं व रंग लगाकर एक दूसरे के गले मिलते हैं सभी बुराइयां दूर कर होली मनाते हैं ग्राम में 1 वर्ष मैं जिनके घरों में मृत्यु होती है उन घरों में जाने के लिए मंदिर में एकत्रित होते हैं। ढोल के साथ मंदिर से ग्रामीणों की बड़ी संख्या में पुरुष व महिलाएं व बच्चे रंग गुलाल लगा कर चलते हैं ग्राम के सरपंच व अन्य बुजुर्ग  भी साथ होते हैं जिन घरों में मृत्यु होती है उनके घर जाकर उनके दुख को भुलाने का प्रयास किया जाता है व रंग डाला
जाता है ।

 शीतला सप्तमी पर माता की पूजा अर्चना की जाती है शीतला सप्तमी के दिन महिलाएं शीतला माता की पूजा अर्चना करती है सप्तमी के दिन बासी भोजन जो 1 दिन पूर्व बना हुआ होता है जो कि मीठा होता है उसी भोजन का भोग माता को लगाया जाता है उसके बाद वहीं भोजन खाया जाता है जिसे निमाड़ी में ठंडा धान कहते हैं सप्तमी के दिन भोजन प्रत्येक घर पर नहीं बनाया जाता सामूहिक भोज किया जाता है इसी प्रकार पूजा अर्चना के बाद ग्राम के मुखिया महिलाएं बच्चे बुजुर्ग ग्राम के प्रधान सरपंच होलिका दहन वाले स्थान पर ढोल धमाकों के साथ जाकर ग्राम के सारे लोग मृत परिवार के लोग इकट्ठे होकर होली माता की पूजा अर्चना कर पानी को लोटो से होली  मैं डाल कर उसे ठंडा किया जाता है इसी प्रकार मृत परिवार को भोजन खिलाकर होली का त्योहार मनाया जाता है सूखे रंग व गुलाल से होली खेली जाती है।

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