इंदौर की रेशम केन्द्र गौशाला में गोवर्धन पूजा, मुख्यमंत्री ने गाय के दूध को बताया ‘अमृत’

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को इंदौर के हातोद स्थित रेशम केन्द्र गौशाला में आयोजित गोवर्धन पूजा कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गोवर्धन पूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने गौ-वंश के संरक्षण और किसानों के उत्थान से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं।

डॉ. यादव ने कहा कि गौ-शालाओं को समाज एवं सरकार के सहयोग से गौ-मंदिर के रूप में विकसित किया जाएगा और उनके स्वावलंबन के लिए हर संभव मदद दी जाएगी। उन्होंने कहा कि नगरीय निकाय गौ-शालाओं का सुव्यवस्थित संचालन करेंगे और निराश्रित गायों को सुरक्षित रूप से गौ-शालाओं में रखा जाएगा।

पुरानी परंपरा, नया संबल:

मुख्यमंत्री ने गाय के सांस्कृतिक और पोषण संबंधी महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गाय का दूध अमृत है और गौ-माता दोहरा पोषण करती है। उन्होंने कहा कि परम्परागत रूप से घरों में पहली रोटी गाय के लिए बनाई जाती है।

गोवर्धन पर्वत की सुंदर साज-सज्जा के लिए मुख्यमंत्री ने बालिका महक शर्मा को ₹5,000 का प्रोत्साहन दिया और ₹11,000 अतिरिक्त देने की घोषणा की। उन्होंने गौ-शाला के अखाड़े का अवलोकन किया, कुश्ती देखी और पहलवानों का हौसला बढ़ाते हुए अखाड़े में मेट की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया।

जनप्रतिनिधियों और संतों के विचार:

  • मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने गौ-माता की सेवा को सबसे बड़ा धर्म बताया और गौ-शालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गोबर-गोमूत्र के उपयोग पर जोर दिया।
  • मंत्री तुलसीराम सिलावट ने मुख्यमंत्री द्वारा प्रति गाय पोषण राशि को दोगुना किए जाने की सराहना की और रेशम केन्द्र गौशाला को आदर्श गौशाला बनाने की बात कही।
  • महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि गौ-शाला में गायों की संख्या $2300$ से अधिक हो गई है और यहाँ बीमार गायों के उपचार के लिए आईसीयू सेंटर सहित एक हॉस्पिटल भी स्थापित किया गया है।
  • स्वामी अच्युतानंद जी महाराज ने मुख्यमंत्री के गौ-प्रेम की प्रशंसा करते हुए बताया कि गौ-शाला में $100$ से $150$ लीटर दूध प्रतिदिन उत्पादित हो रहा है।

आत्मनिर्भरता की पहल:

मुख्यमंत्री ने गोबर से निर्मित स्वदेशी दीयों के स्टॉल का अवलोकन कर सराहना की। दीपावली पर्व पर इस पहल के अंतर्गत लगभग दो लाख दीयों का विक्रय किया गया, जिससे स्थानीय स्वावलंबन को प्रोत्साहन मिला।

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