मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया वॉटर शेड महोत्सव का शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया वॉटर शेड महोत्सव का शुभारंभ, पंचायतों को ₹25 लाख तक खर्च करने का अधिकार
भोपाल, 25 नवंबर: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में ‘आत्मनिर्भर पंचायत-समृद्ध मध्यप्रदेश’ राज्य स्तरीय कार्यशाला का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना वाटर शेड विकास 2.0 के अंतर्गत वॉटर शेड महोत्सव का भी शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय चिंतन में गांव को स्वराज और आत्मनिर्भरता की प्रथम इकाई माना गया है। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला विकसित भारत@2047 के लिए निर्णायक कदम है और गर्व का विषय है कि इसकी ठोस रणनीति प्रदेश के पंचायत प्रतिनिधि तैयार कर रहे हैं।
पंचायत प्रतिनिधियों को सशक्तिकरण: राज्य सरकार पंचायत संस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि:
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जिला/जनपद उपाध्यक्षों के शिक्षा समिति के निरीक्षण और सुझावों को अब शासन द्वारा लिपिबद्ध कर अमल में लाया जाएगा।
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सरपंचों को पंचायत गतिविधियों पर खर्च के लिए ₹25 लाख तक की राशि खर्च करने का अधिकार दिया गया है।
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राज्य सरकार ने पंचायतों को पीने के पानी का प्रबंध करने का अधिकार भी दिया है।
विकास और कृषि पर विशेष ध्यान: डॉ. यादव ने पंचायतों से अपील की कि वे निवेश और निवास की बेहतर व्यवस्था के लिए मास्टर प्लान बनाएं। उन्होंने किसानों को 90% अनुदान पर मिलने वाले 3 से 5 हॉर्स पावर के सोलर पंप योजना को आगे बढ़ाने का आग्रह किया, जो किसानों को बिजली के लिए आत्मनिर्भर बनाएगा।
जल गंगा संवर्धन अभियान में सम्मान: मुख्यमंत्री ने जल गंगा संवर्धन अभियान में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों, सहयोगी संस्थाओं और नॉलेज पार्टनर संस्थाओं को पुरस्कृत किया। खण्डवा जिले ने समग्र रूप से श्रेष्ठ कार्य करने वाले जिलों की श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि रायसेन और बालाघाट क्रमशः द्वितीय और तृतीय रहे।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने पंचायतों को केवल आर्थिक रूप से नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से भी आत्मनिर्भर बनाने पर ज़ोर दिया, जिसमें नशामुक्ति, स्वच्छता और आपसी विवादों की समाप्ति शामिल है। उन्होंने पंचायतों के विकास के लिए ₹6000 करोड़ की पंचम वित्त की राशि का भी उल्लेख किया। यह कार्यशाला 26 नवंबर तक चलेगी, जिसमें बड़ी संख्या में जन-प्रतिनिधि और विषय-विशेषज्ञ उपस्थित हैं।



