‘लखपति बीघा’ लक्ष्य: कृषि में बिचौलियों को खत्म करने के निर्देश

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान कृषि क्षेत्र में बड़े बदलाव के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ‘लखपति दीदी’ की तर्ज पर ‘लखपति बीघा’ का लक्ष्य तय किया जाए, जिसके तहत एक बीघा जमीन से एक लाख रुपये कमाने वाले किसानों को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने किसानों को बिचौलियों से बचाकर सीधे बाजार से लाभ दिलाने के लिए आवश्यक व्यवस्था बनाने, और उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने के लिए ग्राम स्तर पर सघन गतिविधियां चलाने पर जोर दिया। उन्होंने हर संभाग की नर्सरियों को आदर्श रूप में विकसित करने और नरवाई (पराली) प्रबंधन के लिए तीन साल की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। साथ ही, किसानों को उर्वरक की आसान उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अद्यतन तकनीक का इस्तेमाल करने को कहा।

बैठक में विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों का प्रस्तुतिकरण दिया गया, जिसके अनुसार प्रदेश दालों, तिलहन और मक्का उत्पादन में देश में पहले स्थान पर है, जबकि खाद्यान्न, अनाज और गेहूं उत्पादन में दूसरे स्थान पर है।

प्रमुख नवाचार और उपलब्धियाँ:

  • ई-मंडी और एमपी फार्म गेट ऐप: प्रदेश की सभी 259 मंडियों में ई-मंडी लागू होने पर स्कॉच गोल्ड अवार्ड और ‘एमपी फार्म गेट ऐप’ के लिए स्कॉच सिल्वर अवार्ड प्राप्त हुआ। यह ऐप किसानों को सीधे अपने खलिहान से उपज बेचने में सक्षम बनाता है।

  • फसल बीमा और सम्मान निधि: वर्ष 2024-25 में 1.79 करोड़ बीमित किसानों को 1275.86 करोड़ रुपये के फसल बीमा दावों का भुगतान किया गया। मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत भी बड़ी सहायता राशि वितरित की गई।

  • यंत्रीकरण: कृषि यंत्रीकरण के लिए भोपाल और इंदौर में ड्रोन पायलट स्कूल शुरू किए गए।

  • उर्वरक वितरण में तकनीक: उर्वरक वितरण के लिए ई-विकास पोर्टल का पायलट प्रोजेक्ट विदिशा, शाजापुर और जबलपुर में क्रियान्वित किया गया, जिसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।

आगामी तीन वर्ष की कार्ययोजना के मुख्य बिंदु:

  • सभी 363 नगर पालिका/नगर पंचायतों में साप्ताहिक जैविक/प्राकृतिक हाट बाजार लगाए जाएंगे।

  • पर ड्रॉप मोर क्रॉप (दबाव सिंचाई): वर्ष 2027-28 तक 2 लाख हेक्टेयर में दबाव सिंचाई प्रणाली का लक्ष्य।

  • पराली प्रबंधन: वर्ष 2027-28 तक पराली जलाने की घटनाओं में 80% की कमी का लक्ष्य।

  • आगामी दो वर्षों में सभी मंडियों को हाईटेक बनाया जाएगा।

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