सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर बनेगा भव्य द्वार; सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा – ‘सुशासन का अद्भुत मॉडल’ दिया MP ने

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को कहा कि मध्य प्रदेश की धरती ने सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन का अद्भुत मॉडल सभी के लिए प्रस्तुत किया है। उन्होंने घोषणा की कि भोपाल में विभिन्न मार्गों पर 9 भव्य द्वार निर्मित किए जाएंगे, जो महापुरुषों और उनकी विरासत को प्रस्तुत करेंगे। मुख्यमंत्री समत्व भवन में हुजूर विधानसभा क्षेत्र के नागरिकों द्वारा आयोजित अभिनंदन समारोह में बोल रहे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजा भोज के एक हज़ार साल पूरे होने पर भोज-नर्मदा द्वार का भूमि-पूजन किया गया था। अब 13 दिसंबर को सम्राट विक्रमादित्य के दो हज़ार साल पूर्ण होने पर उनके नाम पर बनने वाले विक्रमादित्य द्वार का भूमि-पूजन किया जाएगा। उन्होंने राजधानी के गौरवशाली अतीत को निखारने की प्रतिबद्धता दोहराई।

बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को याद करते हुए डॉ. यादव ने कहा कि आज विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र वाले देश में ‘चाय वाला’ प्रधानमंत्री और ‘गाय वाला’ मुख्यमंत्री है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में विरासत के साथ विकास का कार्य निरंतर तेज गति से जारी है।

विकास और संस्कृति: मुख्यमंत्री ने आध्यात्मिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का मंदिर, काशी का आनंद और महाकाल में महालोक का निर्माण हुआ है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में आचार्य सांदीपनि का आश्रम है, जहां भगवान श्रीकृष्ण ने शिक्षा प्राप्त की थी।

गौ-संरक्षण: डॉ. यादव ने गौमाता को सनातन संस्कृति में पूजनीय बताया और कहा कि सरकार गौशाला संचालकों को सभी आवश्यक सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने ‘मुख्यमंत्री डॉ. अंबेडकर कामधेनु योजना’ के शुभारंभ की जानकारी भी दी।

विधायक श्री रामेश्वर शर्मा ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन करते हुए कहा कि डॉ. यादव ने विरासत के साथ विकास का अद्भुत और अद्वितीय संगम समाहित कर एक नया मॉडल प्रस्तुत किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राजा भोज की राजधानी को गौरव प्रदान करने की बात कही। विधायक शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दो वर्ष पूर्ण होने पर विक्रमादित्य द्वार का भूमिपूजन किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि अब भोपाल से मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और अन्य शहरों के लिए विमान सेवाएं भी शुरू हो गई हैं।

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