‘पूर्व के मैनचेस्टर’ सुआलकुची पहुँचे डॉ. मोहन यादव; असम के सुनहरे रेशम की बुनाई तकनीक की बारीकियों को समझा

असम की सांस्कृतिक राजधानी के समीप बसा सुआलकुची गाँव गुरुवार को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की आत्मीय उपस्थिति का साक्षी बना। गुवाहाटी से 35 किलोमीटर दूर स्थित इस गाँव को ‘पूर्व का मैनचेस्टर’ कहा जाता है, जहाँ की हवाओं में रेशम के धागों की गूँज सुनाई देती है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यहाँ की विश्व प्रसिद्ध तीन श्रेणियों के रेशम के बारे में जानकारी ली:

  1. मूगा: असम का दुर्लभ सुनहरा रेशम।

  2. पैट: हाथीदांत जैसा सफेद और चमकदार रेशम।

  3. एरी: अपनी कोमलता के लिए प्रसिद्ध हल्का बेज रेशम।

मुख्यमंत्री ने बुनकरों के घरों में जाकर मेखला चादर, साड़ियाँ और गमछे बनाने की पारंपरिक विधि को देखा। उन्होंने संग्रहालय में प्रदर्शित हस्तशिल्प के क्रमिक विकास की सराहना की। यह दौरा मध्यप्रदेश के कुटीर उद्योगों को सुदृढ़ करने और यहाँ की शिल्प कला से प्रेरणा लेने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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