जनजातीय उत्पादों को मिलेगा ग्लोबल बाजार; मुख्यमंत्री ने उज्जैन में शुरू किया ‘श्री महाकाल वन मेला’, 30 लाख संग्राहकों को होगा सीधा लाभ

उज्जैन: मध्य प्रदेश की समृद्ध वन संपदा और जनजातीय कौशल को बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में वन मेले की शुरुआत की। भोपाल के सफल आयोजन के बाद यह पहला मौका है जब किसी अन्य शहर में इतना विशाल वन मेला आयोजित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन मेलों के माध्यम से हमारे जनजातीय भाई-बहनों को उनके काष्ठ शिल्प और वनोपज विक्रय का सुनहरा अवसर मिलता है।
अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल के अनुसार, म.प्र. लघु वनोपज संघ से प्रदेश के 30 लाख जनजातीय संग्राहक जुड़े हैं। मेले में ‘विंध्य हर्बल’ के प्राकृतिक रंग-गुलाल, महुआ के लड्डू और श्रीअन्न (मिलेट्स) के उत्पाद प्रमुख आकर्षण हैं। मुख्यमंत्री ने ‘महाकाल वन प्रसादम्’ भी लॉन्च किया, जो एक अनूठी पहल है। इसमें लकड़ी के गमले में पौधा दिया जाएगा, जिसे सीधे मिट्टी में रोपा जा सकेगा और गमला गलकर खाद बन जाएगा। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से अपील की कि वे इन स्थानीय उत्पादों को खरीदकर आत्मनिर्भर भारत की दिशा में योगदान दें।



