राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश अग्रणी, विश्वविद्यालय अब राष्ट्र निर्माण की कार्यशाला बनेंगे: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित “कर्मयोगी बनें” कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य व्यक्ति को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में लागू की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP) शिक्षा व्यवस्था की जटिलता को कम करने और इसे जीवन के अनुभवों से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास है। मध्यप्रदेश इस नीति को लागू करने वाला देश का अग्रणी राज्य है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय अब केवल डिग्री बांटने वाले केंद्र नहीं रहेंगे, बल्कि इन्हें राष्ट्र के भविष्य की ‘कार्यशालाओं’ के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने ‘कर्मयोगी शिक्षाविद्’ की अवधारणा पर बल देते हुए कहा कि शिक्षकों को केवल पाठ पढ़ाने के बजाय छात्रों को प्रेरित करना चाहिए। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार और अपर मुख्य सचिव श्री अनुपम राजन भी मौजूद रहे।


