कृषि कैबिनेट 2026: भीलट देव के दर्शन के साथ मुख्यमंत्री ने किया ‘किसान कल्याण’ का शंखनाद

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़वानी प्रवास के दौरान निमाड़ के किसानों की प्रगति को राज्य की उन्नति का आधार बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से नर्मदा का जल सूखे खेतों तक पहुँच रहा है, जिससे किसान अब एक से अधिक फसलें लेकर आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं।
प्राकृतिक खेती और मृदा स्वास्थ्य पर विशेष जोर: मुख्यमंत्री ने किसानों से एक महत्वपूर्ण अपील करते हुए कहा कि वे रासायनिक खाद के स्थान पर ‘प्राकृतिक खेती’ को अपनाएं। उन्होंने स्वीकार किया कि शुरुआती वर्षों में उत्पादन थोड़ा कम हो सकता है, लेकिन यह मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बचाए रखने का एकमात्र स्थायी तरीका है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि धीरे-धीरे मृदा स्वास्थ्य सुधरेगा और उत्पादन क्षमता में स्वतः ही वृद्धि होगी।
प्रदर्शनी का अवलोकन और कृषि मॉडल: कैबिनेट बैठक से पहले मुख्यमंत्री ने परिसर में आयोजित एक भव्य कृषि प्रदर्शनी का अवलोकन किया। बड़वानी कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह ने प्रदर्शनी की विभिन्न थीम पर प्रस्तुतिकरण दिया, जिसमें निम्नलिखित प्रमुख मॉडल आकर्षण का केंद्र रहे:
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केले का विकास मॉडल: निर्यात और स्थानीय व्यापार की संभावनाओं पर केंद्रित।
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डॉलर चना मूल्य श्रृंखला: उत्पादन से लेकर बाजार तक की कड़ियों का प्रदर्शन।
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बड़वानी मिर्च और तिल: उभरती हुई फसलों के रूप में इनके प्रभावी मॉडल्स।
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नवाचार: सिकलसेल उन्मूलन और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे कार्यक्रमों का प्रदर्शन।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की बड़वानी यात्रा के प्रमुख प्रशासनिक और विकासात्मक बिंदु इस प्रकार हैं:
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राजकीय संकल्प: वर्ष 2026 को आधिकारिक तौर पर ‘किसान कल्याण वर्ष’ घोषित किया गया है, जिसका लक्ष्य किसानों की आय और जीवन स्तर में सुधार करना है।
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आराध्य को सम्मान: निमाड़-मालवा के लोक देवता भीलट देव को शासन स्तर पर सम्मान देते हुए कैबिनेट की बैठक उनके तपस्या स्थल के निकट आयोजित की गई।
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सिंचाई क्रांति: मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि ‘सूक्ष्म उन्नयन सिंचाई परियोजनाओं’ (Micro Irrigation Projects) ने बड़वानी और निमाड़ के कायाकल्प में मुख्य भूमिका निभाई है।
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विविध कृषि प्रदर्शनी: जिला प्रशासन द्वारा आयोजित प्रदर्शनी में ‘गन्ना आर्थिक मॉडल’ और ‘वन्य ग्राम समृद्धि अभियान’ जैसे विषयों पर तकनीकी जानकारी साझा की गई।
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प्राकृतिक खेती को बढ़ावा: सरकार का लक्ष्य किसानों को पारंपरिक और सुरक्षित खेती की ओर मोड़ना है, ताकि भावी पीढ़ियों के लिए जमीन उपजाऊ बनी रहे।



