ईरान-इजराइल युद्ध का एनर्जी वॉर: खाड़ी देशों की रिफाइनरियों पर हमले, 10 दिन में 60% महंगा हुआ क्रूड ऑयल

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष अब एक ‘ऊर्जा युद्ध’ का रूप ले चुका है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर द्वारा अन्य ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने की धमकी के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति चरमरा गई है। 28 फरवरी से शुरू हुई इस जंग के बाद ब्रेंट क्रूड ने 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध के स्तर ($100) को पीछे छोड़ते हुए $116 का आंकड़ा छू लिया है।
सप्लाई चेन पर प्रहार: सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे प्रमुख निर्यातक देश ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के बंद होने से संकट में हैं। टैंकरों की आवाजाही रुकने से सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो गई है। ईरान द्वारा कतर और सऊदी अरब की ऑयल फैसिलिटीज पर किए गए ड्रोन हमलों ने आग में घी डालने का काम किया है।
भारत की स्थिति: हालांकि हालात गंभीर हैं, लेकिन भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि घबराने की जरूरत नहीं है। देश के पास 7 से 8 हफ्तों का पर्याप्त बैकअप स्टॉक मौजूद है, जिससे तत्काल कमी का खतरा नहीं है।



