जी-7 मंच पर भारत की आवाज: जयशंकर ने आर्थिक सुरक्षा, सप्लाई चेन और वैश्विक खतरों पर रखा जोर

फ्रांस में हुई जी-7 विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत ने वैश्विक मुद्दों पर अपनी स्पष्ट और मजबूत स्थिति प्रस्तुत की। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बैठक के दौरान आर्थिक सुरक्षा, समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता और नार्को-आतंकवाद जैसे अहम विषयों को प्रमुखता से उठाया।
उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार और आर्थिक स्थिरता के लिए समुद्री मार्गों की निर्बाध आवाजाही जरूरी है। इसके साथ ही, नार्को-आतंकवाद के बढ़ते खतरे को उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताया।
बैठक में महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन को लेकर भी चर्चा हुई, जहां देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की गई। जयशंकर ने इसे वैश्विक विकास और तकनीकी प्रगति के लिए आवश्यक बताया।
फ्रांस यात्रा के दौरान उन्होंने जापान, दक्षिण कोरिया और कनाडा के विदेश मंत्रियों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। कनाडा की अनीता आनंद के साथ बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों और पश्चिम एशिया की स्थिति पर विचार-विमर्श हुआ।
जयशंकर ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) को वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना अंतरराष्ट्रीय संपर्क और व्यापार को नई दिशा दे सकती है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों ने मजबूत और सुरक्षित व्यापार मार्गों की आवश्यकता को और अधिक स्पष्ट कर दिया है।
इसके अलावा, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि वैश्विक दक्षिण के देशों की चिंताओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। ऊर्जा, खाद्य और आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों पर उन्होंने सामूहिक प्रयासों की अपील की।


