सीहोर का ‘खारी’ और बैतूल का ‘बाचा’ बने मॉडल पर्यटन ग्राम; घर बैठे लखपति बन रहे ग्रामीण

मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग की होम-स्टे योजना से छोटे गाँवों में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। सीहोर जिले का ग्राम खारी एक मॉडल पर्यटन ग्राम के रूप में उभरा है, जहाँ अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अध्ययन किया है।
सफलता की कहानियाँ:
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बाचा गाँव (बैतूल): यहाँ गणेश उइके द्वारा संचालित ‘ताप्ती विहार होम-स्टे’ ने डेढ़ साल में ₹2 लाख का शुद्ध मुनाफा कमाया है। आज इस गाँव में 8 होम-स्टे (शिवगंगा, गुलमोहन, जयसेवा आदि) संचालित हैं, जो नागपुर हाईवे से सटे होने के कारण पर्यटकों की पहली पसंद बन गए हैं।
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तामिया (छिंदवाड़ा): पातालकोट के पास चिमटीपुर में रूपलाल पंदाराम और उनके भाई तीन होम-स्टे चला रहे हैं। उन्होंने कनाडा के पर्यटकों की मेजबानी की और अब तक ₹3 लाख की आय अर्जित की है। यहाँ के ‘गैंडी’ और ‘सैताम’ नृत्य पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
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नावड़ा टौड़ी (खरगोन): नर्मदा तट पर स्थित चंदा बाई केवट के होम-स्टे ने शुरुआती दौर में ही ₹2.50 लाख की आय कर ली है।
जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने भी इन होम-स्टे के प्रबंधन की सराहना करते हुए इसे ग्रामीण विकास का एक सशक्त माध्यम बताया है। सरकार की इस पहल से ग्रामीण अब अपने खेतों और बागवानी को संवारकर ‘अतिथि देवो भव:’ की परंपरा को व्यवसाय से जोड़ रहे हैं।



