मजदूरी से ‘लखपति दीदी’ बनने तक का सफर: बालाघाट की सुमा उइके, जिनकी सफलता की गूंज ‘मन की बात’ में भी सुनाई दी

यह कहानी है कटंगी विकासखंड के ग्राम भिजयापार की रहने वाली श्रीमती सुमा उइके की, जिन्होंने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से गरीबी की बेड़ियों को तोड़ दिया। एक समय था जब जनजातीय परिवार से आने वाली सुमा का जीवन केवल घर और मजदूरी तक सीमित था। उनकी मासिक आय महज 4500 रुपए थी, जिससे परिवार का गुजारा करना मुश्किल था।
वर्ष 2019 में उनका जीवन तब बदला जब वे “जनजातीय आजीविका स्वयं सहायता समूह” से जुड़ीं। यहाँ से उन्होंने बचत और स्वरोजगार के गुर सीखे। उन्होंने जैविक मशरूम उत्पादन से अपनी नई पारी शुरू की और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज सुमा उइके न केवल खुद आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं। उनकी इस अविश्वसनीय यात्रा की सराहना स्वयं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 29 जून 2025 को “मन की बात” कार्यक्रम में की थी।



