सनातन विरासत का आधार हैं आदि शंकराचार्य: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ओंकारेश्वर में रेखांकित किया अद्वैत दर्शन का महत्व

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ओंकारेश्वर में आयोजित एकात्म पर्व के दौरान आदि शंकराचार्य के जीवन और उनके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि केरल से आए 8 वर्षीय बालक शंकर ने इसी पवित्र भूमि पर गुरु गोविंदपाद से शिक्षा पाकर आदि शंकराचार्य के रूप में सनातन धर्म की धारा को पुनर्जीवित किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, यदि हमारी शास्त्र परंपराएं और विरासत आज जीवित हैं, तो यह आदिगुरु के आशीर्वाद से ही संभव हुआ है।
मुख्यमंत्री ने प्रभु श्री राम के चित्रकूट आगमन और श्री कृष्ण की उज्जयिनी शिक्षा का उल्लेख करते हुए मध्य प्रदेश को आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि अद्वैत दर्शन केवल ग्रंथों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पं. दीनदयाल उपाध्याय के ‘अंत्योदय’ और दूसरों के कल्याण के भाव में भी झलकता है। कार्यक्रम में मौजूद विद्वानों ने भी ‘क्वांटम फिजिक्स’ और पर्यावरण संरक्षण में वेदों की प्रासंगिकता पर चर्चा की।



