पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में टीकाकरण तेज करने की डब्ल्यूएचओ की अपील, बीमारियों के दोबारा फैलने की चेतावनी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में टीकाकरण अभियानों को और सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि प्रयासों में तेजी नहीं लाई गई तो टीके से रोकी जा सकने वाली बीमारियां फिर से फैल सकती हैं।

फिलीपींस के मनीला स्थित डब्ल्यूएचओ के पश्चिमी प्रशांत क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि अब तक टीकाकरण कार्यक्रमों से हासिल उपलब्धियों को सुरक्षित रखना जरूरी है। साथ ही, उन बच्चों तक पहुंच बढ़ाने की आवश्यकता बताई गई जो अभी भी नियमित टीकाकरण से वंचित हैं। संगठन ने जीवन के हर चरण में टीकों के प्रति लोगों का भरोसा बनाए रखने पर भी बल दिया।

डब्ल्यूएचओ के पश्चिमी प्रशांत क्षेत्रीय निदेशक साया माउ पिउकाला ने कहा, “टीके विज्ञान और चिकित्सा की एक बड़ी उपलब्धि हैं, जिन्होंने कई पीढ़ियों तक परिवारों और समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित की है, लेकिन इस सुरक्षा को हल्के में नहीं लिया जा सकता।” उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2024 में इस क्षेत्र में करीब 21 लाख बच्चे कम से कम एक टीके की खुराक से वंचित रह गए, जिससे वे कई रोकी जा सकने वाली बीमारियों के जोखिम में हैं।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, लगभग 2.2 अरब की आबादी वाले इस क्षेत्र में, जो वैश्विक जनसंख्या का एक चौथाई से अधिक है, सदस्य देशों ने टीकाकरण के माध्यम से उल्लेखनीय प्रगति की है। हालांकि, समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक संगठन ने कहा कि इस प्रगति को बनाए रखने के लिए नियमित टीकाकरण व्यवस्था को मजबूत करना, वंचित समुदायों तक पहुंच बढ़ाना और टीकों की विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

संगठन ने बताया कि टीकाकरण के कारण इस क्षेत्र में लाखों मौतों और विकलांगताओं को रोका जा सका है, लेकिन कई देशों में टीकों तक असमान पहुंच अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। वैक्सीन-प्रिवेंटेबल डिजीजेज और इम्यूनाइजेशन (वीडीआई) इकाई का उद्देश्य इस क्षेत्र को ऐसी बीमारियों से मुक्त बनाना है, जिसके लिए सदस्य देशों को वैश्विक वैक्सीन एक्शन प्लान के क्षेत्रीय लक्ष्यों को पूरा करने में सहायता दी जा रही है।

पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख टीकाकरण लक्ष्यों में पोलियो-मुक्त स्थिति बनाए रखना, मातृ और नवजात टेटनस का उन्मूलन, खसरा समाप्त करना, हेपेटाइटिस बी के नियंत्रण को मजबूत करना, रुबेला का उन्मूलन, नए टीकों की शुरुआत, टीकाकरण कवरेज बढ़ाना और जापानी एन्सेफलाइटिस के नियंत्रण को तेज करना शामिल है।

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