किसानों को बड़ी राहत: अब जिले के किसी भी केंद्र पर बेच सकेंगे गेहूं, ₹2625 प्रति क्विंटल की दर से होगा भुगतान

प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने गेहूं उपार्जन की नई व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए कहा कि किसानों को अब अपनी उपज बेचने के लिए केवल स्थानीय केंद्रों पर निर्भर नहीं रहना होगा; वे अब जिले के किसी भी सुविधानुसार केंद्र का चयन कर सकते हैं। सरकार ने उपार्जन केंद्रों पर किसानों के बैठने के लिए छायादार स्थान, पेयजल और अन्य आवश्यक जनसुविधाओं के पुख्ता इंतजाम किए हैं। उपज की त्वरित सफाई और तौल के लिए केंद्रों पर पंखे, छन्ने और कंप्यूटर जैसी तकनीकी व्यवस्थाएं की गई हैं।
मंत्री श्री राजपूत के अनुसार, इस वर्ष उपार्जित गेहूं के सुरक्षित भंडारण के लिए भी व्यापक प्रबंध किए गए हैं। गेहूं की पैकिंग के लिए जूट बारदानों के साथ-साथ पीपी और एचडीपी (PP/HDP) बैग्स का भी उपयोग किया जा रहा है। उपार्जन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के व्यवधान को रोकने के लिए इंटरनेट कनेक्टिविटी और पर्याप्त संख्या में तुलावटियों की तैनाती की गई है। सरकार का लक्ष्य है कि 100 लाख मीट्रिक टन के इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को सुचारू और पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाए।
प्रदेश में अब तक हुई खरीदी का विवरण देते हुए उन्होंने बताया कि लाखों किसानों को उनके उत्पाद का सही मूल्य समय पर मिल रहा है। स्लॉट बुकिंग की अवधि 9 मई तक बढ़ाए जाने से उन किसानों को विशेष लाभ होगा जो अभी तक अपनी बारी सुरक्षित नहीं कर पाए थे। सरकार की इस रणनीति का उद्देश्य न केवल उपार्जन के लक्ष्य को प्राप्त करना है, बल्कि प्रतिकूल मौसम या अन्य चुनौतियों के बीच किसानों की आर्थिक सुरक्षा को भी प्राथमिकता देना है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में विभाग हर केंद्र पर गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध खरीदी सुनिश्चित कर रहा है।


