दिव्यांगजन सशक्तिकरण में मध्यप्रदेश अग्रणी: सीएम डॉ. मोहन यादव ने की कल्याणकारी योजनाओं और उपलब्धियों की समीक्षा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि समाज में दिव्यांगजनों की स्थिति सहानुभूति की नहीं, बल्कि समान हक और अवसरों की होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दिव्यांगता शारीरिक दुर्बलता नहीं है, बल्कि ये ‘दिव्य शक्ति’ के अंश हैं जो अपनी इच्छाशक्ति से इतिहास रचते हैं। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि एक विकसित समाज वही है जहाँ दिव्यांगजन देश की प्रगति में बराबर के भागीदार हों। राज्य सरकार उनकी शैक्षणिक, आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है।

मध्यप्रदेश में दिव्यांगजनों के लिए किए गए विशेष प्रबंधों की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकारी नौकरियों में 4 प्रतिशत आरक्षण के साथ-साथ हर विभाग में ‘समान अवसर प्रकोष्ठ’ का गठन किया गया है। बुनियादी ढांचे को सुगम बनाने के लिए सरकारी भवनों में रैंप और विशेष वॉशरूम सुनिश्चित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की संस्थाओं में कार्यरत अतिथि शिक्षकों का मानदेय बढ़ाकर 18 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। राज्य में विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र (UDID) और टोल-फ्री हेल्पलाइन (1800-233-4397) के माध्यम से समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जा रहा है।

पिछले दो वर्षों के आंकड़ों को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि विशेष भर्ती अभियान के तहत अक्टूबर 2025 तक 2,589 दिव्यांगजनों को शासकीय पदों पर नियुक्तियां दी गई हैं। शैक्षणिक सुधारों के तहत 168 स्मार्ट क्लास तैयार की गई हैं और दृष्टिबाधितों के लिए ब्रेल लिपि में बुकलेट उपलब्ध कराई गई है। खेलों के क्षेत्र में भी राज्य सरकार ने प्रोत्साहन देते हुए इंग्लिश चैनल स्विमिंग के लिए सतेन्द्र लोहिया और रामबरन पाल को 5-5 लाख रुपये की सहायता दी है। इसके अलावा, कन्या विवाह और कल्याणी विवाह सहायता योजनाओं के माध्यम से हजारों हितग्राहियों को करोड़ों रुपये की आर्थिक मदद पहुंचाई गई है।

मुख्यमंत्री ने भोपाल को दिव्यांगजन अध्ययन और पुनर्वास के एक राष्ट्रीय केंद्र के रूप में विकसित करने की बात कही। सीहोर में NIMHR जैसे संस्थानों के सहयोग से मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास के क्षेत्र में मध्यप्रदेश नई दिशा दे रहा है। साथ ही, ‘नशामुक्त भारत अभियान’ में मध्यप्रदेश ने देश में सर्वाधिक 33 प्रतिशत भागीदारी दर्ज की है। प्रदेश के 10 जिलों में व्यसन उपचार केंद्र (ATF) संचालित किए जा रहे हैं, जो स्वस्थ और नशामुक्त समाज के निर्माण में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button