एबीवीपी की कार्यप्रणाली अनुकरणीय, सामाजिक समरसता को व्यवहार में उतारता है संगठन: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की सराहना करते हुए इसे एक ऐसा संगठन बताया जो केवल सिद्धांतों तक सीमित न रहकर सामाजिक समरसता को धरातल पर उतारने का कार्य करता है। जबलपुर के घंटाघर स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस कल्चरल एंड इंर्फोमेशन सेंटर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी पढ़ाई के साथ-साथ देश के सांस्कृतिक गौरव को भी आत्मसात करें और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। यह कार्यक्रम विद्यार्थी परिषद के शिल्पकार माने जाने वाले स्वर्गीय यशवंत राव केलकर की जन्मशती के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. केलकर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें परिषद के वर्तमान स्वरूप की ‘नींव का पत्थर’ करार दिया। उन्होंने कहा कि स्व. केलकर ने संगठन को मजबूत करने में अपना पूरा जीवन खपा दिया। अपने छात्र जीवन की यादें साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं को संदेश दिया कि परिषद एक परिवार की तरह है और जीवन में बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए विनम्रता के साथ कार्य करना आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि विद्यार्थी आज के नागरिक हैं और उनमें जोश के साथ होश का संतुलन बनाए रखने में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम के दौरान परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज किशोर तिवारी ने एबीवीपी को विश्व का सबसे बड़ा छात्र संगठन बताया और इसका श्रेय स्व. केलकर द्वारा विकसित कार्य पद्धति को दिया। उन्होंने स्व. केलकर को एक ‘जीवंत आदर्श’ बताया जो निर्धन छात्रों की सहायता के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। समारोह में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, सांसद सुमित्रा बाल्मिक, आशीष दुबे और विधायक अजय विश्नोई सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि एवं पदाधिकारी मौजूद थे। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री द्वारा स्वामी विवेकानंद और माँ सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन और माल्यार्पण के साथ हुई।



