कूनो नेशनल पार्क बना चीता प्रजनन का वैश्विक केंद्र: शावकों की संख्या और नए आगमन से चीतों का कुनबा 57 पहुंचा

मध्यप्रदेश का कूनो नेशनल पार्क अब दुनिया भर में एक सफल चीता प्रजनन केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन ‘प्रोजेक्ट चीता’ के तहत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीते यहाँ की जलवायु में न केवल ढल गए हैं, बल्कि निरंतर वंशवृद्धि भी कर रहे हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 तक कूनो में चीतों की कुल संख्या (शावकों सहित) 57 हो गई है, जिसमें 27 से अधिक शावकों का जन्म भारत की धरती पर ही हुआ है।

प्रोजेक्ट की ऐतिहासिक सफलता को रेखांकित करते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि कूनो की भौगोलिक स्थितियां चीतों के लिए बेहद अनुकूल साबित हुई हैं। अप्रैल 2026 में मादा चीता गामिनी ने 3 स्वस्थ शावकों को जन्म दिया, जबकि इससे पहले ज्वाला, निर्वा और आशा भी नए शावकों को जन्म दे चुकी हैं। विशेष रूप से, भारत में जन्मी मादा चीता ‘मुखी’ द्वारा शावकों को जन्म देना इस परियोजना के लिए ‘जेनेटिक मील का पत्थर’ माना जा रहा है, जो पुनर्स्थापना की दूसरी पीढ़ी के विकास को दर्शाता है।

परियोजना के विस्तार के क्रम में फरवरी 2026 में बोत्सवाना से 9 नए चीते लाए गए, जिससे इस मिशन को और मजबूती मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय से यह लुप्तप्राय प्रजाति अब भारत में स्थायी रूप से स्थापित हो रही है। कूनो की इस सफलता ने न केवल वन्यजीव संरक्षण में नया इतिहास रचा है, बल्कि श्योपुर और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन और स्थानीय रोजगार की नई संभावनाएं भी पैदा की हैं।

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