सामूहिक विवाह सम्मेलनों से दूर हुई निर्धन परिवारों की चिंता, फिजूलखर्ची रोकने के लिए समाज आगे आए: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सामूहिक विवाह जैसे आयोजन आज के दौर में समाज सेवा का सबसे सशक्त माध्यम बनकर उभरे हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदेश के आर्थिक रूप से कमजोर अभिभावकों को अपनी बेटियों के विवाह की चिंता से मुक्ति मिली है। मुख्यमंत्री मंगलवार को श्योपुर जिले के कराहल (सिलपुरी) में आयोजित श्री श्री 1008 श्री नोनार सरकार के सामूहिक विवाह समारोह को मंत्रालय से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर परिणय सूत्र में बंधे 351 नव-युगलों को उनके सुखद वैवाहिक जीवन के लिए शुभकामनाएं और आशीर्वाद प्रदान किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार के सहयोग से आयोजित होने वाले इन कार्यक्रमों ने यह सुनिश्चित किया है कि गरीब परिवारों की बेटियों की शादी भी पूरे मान-सम्मान और भव्यता के साथ संपन्न हो। उन्होंने हाल ही में जबलपुर और धार में आयोजित हुए बड़े सामूहिक विवाह सम्मेलनों का उदाहरण देते हुए कहा कि इस तरह के प्रयास समाज में आ रहे सकारात्मक बदलाव का प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री ने नव-दंपतियों से कहा कि वे न केवल अपने ससुराल, बल्कि अपने मायके की भी रौनक हैं और उनका जीवन सदैव खुशियों से भरा रहे।
सामाजिक कुरीतियों और अनावश्यक खर्चों पर प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने समाज के संपन्न वर्ग से एक महत्वपूर्ण आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समृद्ध परिवारों को भी अपने बच्चों का विवाह सादगीपूर्ण तरीके से करने का संकल्प लेना चाहिए। मुख्यमंत्री के अनुसार, जब समाज के सक्षम लोग फिजूलखर्ची त्याग कर सामूहिक विवाह की परंपरा को अपनाएंगे, तभी यह अभियान एक वास्तविक जन-आंदोलन का रूप ले सकेगा। उन्होंने सिलपुरी में इस सफल आयोजन के लिए श्री नोनार सरकार धाम समिति के प्रयासों की सराहना की।
समारोह के दौरान श्योपुर के कराहल में स्थानीय जनप्रतिनिधि, वर-वधु पक्ष के परिजन और भारी संख्या में ग्रामीण जन उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने वर्चुअली जुड़कर सभी को बधाई दी और सामाजिक एकजुटता के इस मॉडल को भविष्य के लिए प्रेरणादायी बताया।



