मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बड़ा निर्देश: डिजिटल जनगणना के लिए नागरिकों को करें जागरूक, जल संरक्षण को बनाएं जन-आंदोलन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक में मंत्रियों को आगामी डिजिटल जनगणना और जल संरक्षण अभियान को लेकर सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए हैं। बैठक से पूर्व, मुख्यमंत्री द्वारा नारी शक्ति के सम्मान में उठाए गए विधायी कदमों के लिए महिला मंत्रियों ने उनका विशेष सम्मान किया। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में नागरिकों को वर्ष 2027 में होने वाली डिजिटल जनगणना के महत्व को समझाएं और उन्हें मोबाइल ऐप के माध्यम से भागीदारी करने के लिए प्रोत्साहित करें।
किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया को और अधिक लचीला बनाया है। अब किसान अपनी तहसील के बजाय जिले के किसी भी उपार्जन केंद्र पर अपनी उपज बेच सकेंगे। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक केंद्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 कर दी गई है और शनिवार को भी उपार्जन कार्य जारी रखने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक 9.49 लाख किसानों ने स्लॉट बुक किए हैं और उपार्जन प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है।
जल संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ को शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में एक साथ चलाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि व्यापारिक संगठनों, स्वयं सहायता समूहों और अन्य अशासकीय संस्थाओं को इस अभियान का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से 25 मई को ‘गंगा दशहरा’ के अवसर पर बड़े पैमाने पर श्रमदान आयोजित करने का आह्वान किया ताकि प्रदेश की जल संरचनाओं को पुनर्जीवित किया जा सके।
अंत में, मुख्यमंत्री ने शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में राज्य की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि सांदीपनि विद्यालयों का परीक्षा परिणाम पिछले चार वर्षों में रिकॉर्ड स्तर पर सुधरा है। दसवीं का परिणाम 68% से बढ़कर 88% और बारहवीं का 59% से बढ़कर 89% हो गया है। वन्य जीव संरक्षण के मोर्चे पर, उन्होंने कान्हा नेशनल पार्क में जंगली भैंसों की वापसी को प्रदेश की जैव विविधता के लिए एक नया अध्याय बताया और असम सरकार के साथ वन्य जीवों के आदान-प्रदान के सहयोग को भविष्य के लिए सुखद संकेत बताया।



