पन्ना की सिंचाई परियोजनाओं के डूब प्रभावितों के लिए राज्य स्तरीय समिति गठित, 5 दिनों में सौंपेगी रिपोर्ट

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार, पन्ना जिले में निर्माणाधीन मझगांय और रूंज मध्यम सिंचाई परियोजनाओं के डूब क्षेत्र से प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान हेतु राज्य सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति विस्थापन, भू-अर्जन और परिसंपत्तियों से जुड़े विवादों पर सीधे प्रभावितों से संवाद करेगी और उनके हितों को सुरक्षित रखने के लिए शासन को अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन परियोजनाओं की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि ये दोनों सिंचाई योजनाएं पन्ना क्षेत्र के लिए ‘वरदान’ साबित होंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभावित होने वाले प्रत्येक ग्रामीण के हितों का संरक्षण करना सरकार की प्राथमिकता है। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर अजयगढ़ विकासखंड के 86 गांवों की 27,510 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। साथ ही, पेयजल और औद्योगिक जरूरतों के लिए करीब 39.56 मिलियन घन मीटर पानी उपलब्ध होगा, जिससे लगभग 45 हजार किसान परिवारों के जीवन में समृद्धि आएगी।

राज्य सरकार द्वारा गठित इस समिति की अध्यक्षता सागर संभाग के कमिश्नर करेंगे। इसमें जल संसाधन विभाग भोपाल के प्रमुख अभियंता और धसान-केन कछार, सागर के मुख्य अभियंता को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। समिति को आगामी 5 दिनों के भीतर वस्तुस्थिति की जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। वर्तमान में परियोजनाओं का कार्य अंतिम चरण में है और वर्षा ऋतु से पूर्व नाला क्लोजर का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, मझगांय परियोजना के तहत 1657 खातेदारों को लगभग 1.91 अरब रुपये से अधिक का मुआवजा वितरित किया जा चुका है। पुनर्वास के लिए अब तक 660 पात्र परिवारों को 5 लाख रुपये प्रति परिवार की दर से 33 करोड़ रुपये की एकमुश्त सहायता दी गई है। वहीं, रूंज परियोजना में 710 खातेदारों के लिए स्वीकृत 44.23 करोड़ रुपये में से अधिकांश राशि वितरित की जा चुकी है और 670 पात्र परिवारों को पुनर्वास अनुदान का पूर्ण भुगतान किया जा चुका है।

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