जबलपुर में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म का शुभारंभ, सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने व्यवस्था को पूरे देश में लागू करने की वकालत की

भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने जबलपुर में आयोजित “फ्रेगमेंटेशन ऑफ फ्यूजन: एम्पावरिंग जस्टिस वाया-यूनाइटेड डिजिटल प्लेटफार्म इंटीग्रेशन” कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस गरिमामयी समारोह का उद्घाटन सीजेआई ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री संजीव सचदेवा के साथ पारंपरिक रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस विशेष अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीशगण, राज्य के मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित कई वरिष्ठ कानूनविद और न्यायविद भी उपस्थित थे। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री की गरिमामयी उपस्थिति में वंदे मातरम और जन गण मन के गायन के साथ औपचारिक शुरुआत हुई और सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ व प्रतीक चिन्ह देकर आदरपूर्वक स्वागत किया गया।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने मां नर्मदा का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार अमरकंटक से निकलने वाली नर्मदा नदी में छोटी-छोटी नदियां मिलकर उसे विशाल स्वरूप प्रदान करती हैं, ठीक उसी तरह आधुनिक तकनीक की विभिन्न धाराएं कोर्ट, पुलिस, जेल, फॉरेंसिक और मेडिको लीगल शाखाओं को एक संयुक्त डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर आम जनता को न्याय दिलाने में सहायक साबित होंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि आम नागरिकों को समय पर न्याय प्रदान करने के लिए न्यायपालिका को अब अस्पतालों की तर्ज पर चौबीसों घंटे (24X7) तत्पर रहना होगा। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा डिजिटल सेवाओं के माध्यम से न्याय प्रक्रिया को त्वरित और सुगम बनाने के प्रयासों की सराहना करते हुए सीजेआई ने कहा कि इस अनुकरणीय व्यवस्था को देश की सभी अदालतों में अनिवार्य रूप से लागू किया जाना चाहिए। इस डिजिटल पहल से कैदियों की समय पर रिहाई, आकस्मिक मामलों की त्वरित सुनवाई और अदालती आदेशों के डिजिटलीकरण जैसी अनेक सहूलियतें मिलेंगी।

न्याय व्यवस्था में आधुनिक तकनीक की भूमिका को रेखांकित करते हुए सीजेआई ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के सही उपयोग के लिए गठित विशेष समिति ने बेहतरीन कार्य किया है, जिसके सुझावों को जल्द ही देशभर में प्रभावी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही नई तकनीकों को अपनाने में आगे रहा है। कोविड-19 महामारी के संकटकाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस कठिन समय में भी देश की अदालतों का काम नहीं रुका और भारतीय न्यायपालिका ने अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाया, जिसकी वैश्विक स्तर पर सराहना हुई। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में एआई आम आदमी को शीघ्र न्याय दिलाने, अदालतों का समय बचाने, प्रक्रियाओं को गति देने और जस्टिस डिलीवरी सिस्टम को अधिक पारदर्शी बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। हालांकि, उन्होंने सचेत भी किया कि मध्य प्रदेश जैसे सांस्कृतिक और भौगोलिक विविधता वाले राज्य में ग्रामीण नागरिकों को इन ऑनलाइन सुविधाओं का उपयोग सिखाना होगा। इसके लिए स्थानीय व सरल भाषा तथा इंटरनेट की उपलब्धता पर विशेष ध्यान देते हुए पैरा लीगल वॉलेंटियर्स के माध्यम से लोगों को जागरूक करना आवश्यक है।

कार्यक्रम के दौरान मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के कई महत्वपूर्ण डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की ऐतिहासिक लॉन्चिंग की गई। अदालत ने लाइव वीडियो स्ट्रीमिंग के लिए अपना स्वदेशी डिजिटल सिस्टम ‘CLASS’ (कोर्टरूम लाइव ऑडियो-विजुअल स्ट्रीमिंग सिस्टम) लॉन्च किया है, जो ओटीटी की शैली में काम करेगा। इससे बाहरी प्रणालियों पर निर्भरता समाप्त होगी और इसका पूरा नियंत्रण उच्च न्यायालय प्रशासन के पास रहेगा। इसके साथ ही एक नया वेब पोर्टल भी शुरू किया गया है, जहां न्यायाधीशों, वकीलों और फरियादियों को अदालती आदेश तथा जमानत आवेदन जैसे आवश्यक दस्तावेज आसानी से मिल सकेंगे। पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से एआई तकनीक पर आधारित डिजिटल डेटा मैनेजमेंट सिस्टम ‘प्रथम’ और प्रमाणित कॉपियां शीघ्र उपलब्ध कराने के लिए ‘कॉपीइंग ऑटोमेशन एंड ज्यूडीिशियल इन्फॉर्मेशन डिसएमीनेशन सिस्टम’ की शुरुआत की गई। जेल से बंदियों की रिहाई को सुगम बनाने के लिए ऑनलाइन क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम और मध्य प्रदेश पुलिस के सहयोग से वार्ड स्तर पर ‘संकेत समाधान मध्यस्थता केंद्र’ शुरू किए गए। इसके अतिरिक्त, मूक-बधिर नागरिकों के लिए मोबाइल एप्लीकेशन ‘संकेत वाणी’, मध्य प्रदेश ज्यूडीिशियल एकेडमी का ‘ज्योति जर्नल 2.0’ सॉफ्टवेयर और हाईकोर्ट की वार्षिक रिपोर्ट 2025 का विमोचन भी संपन्न हुआ।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि न्याय प्रणाली के डिजिटल होने से पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, जिससे सीधे तौर पर जनता को त्वरित न्याय मिल सकेगा और व्यवस्था की विश्वसनीयता बढ़ेगी। विज्ञान और तकनीक के इस दौर में न्याय व्यवस्था का आधुनिक होना बेहद जरूरी है। यह नया एकीकृत मंच कागजी फाइलों के लंबे और जटिल दौर को खत्म कर उनके त्वरित निपटारे और सुव्यवस्थित प्रबंधन का मार्ग प्रशस्त करेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार सुशासन की दिशा में तेजी से काम कर रही है और तकनीक को इसका मूल मंत्र बनाया है, जिसके तहत साइबर तहसीलों की स्थापना और मंत्रिपरिषद की कार्यवाही को पूरी तरह पेपरलेस किया जा चुका है। उन्होंने सीमित संसाधनों में कुशल शासन चलाने वाली देवी अहिल्या माता और प्राचीन भारत के समृद्ध न्याय तंत्र के प्रतीक सम्राट विक्रमादित्य के पारदर्शी शासन का स्मरण करते हुए कहा कि हमारी जीवन पद्धति में न्याय के मूल्य गहरे रचे-बसे हैं।

केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने इस दिन को देश की न्याय व्यवस्था के लिए ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि मध्य प्रदेश ने देशभर के उच्च न्यायालयों को एकीकरण की नई राह दिखाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ट्रांसफॉर्म, रिफॉर्म और परफॉर्म के सिद्धांत पर आगे बढ़ रहा है। अब डिजिटलाइजेशन केवल दस्तावेजों को स्कैन करने तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न प्रणालियों को जोड़कर पूरी व्यवस्था को मजबूत बनाना है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एन कोटेश्वर सिंह ने भी विचार व्यक्त करते हुए कहा कि फाउंटेन पेन से लिखा गया हमारा संविधान अब एआई के युग में प्रवेश कर चुका है। डिजिटल तकनीक के इस प्रभावी समन्वय से अदालती आदेशों और फॉरेंसिक रिपोर्टों में होने वाली देरी समाप्त होगी और न्यायपालिका नागरिक अधिकारों के प्रति अधिक जवाबदेह बनेगी। सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस आलोक अराधे ने कहा कि अदालती प्रक्रियाओं का सरलीकरण और विभिन्न विभागों का एक मंच पर आना न्याय में होने वाले विलंब की संवैधानिक चिंता को दूर करेगा। कार्यक्रम के समापन पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के एडमिनिस्ट्रेटिव जज जस्टिस विवेक रूसिया ने सभी आगंतुक अतिथियों, सांसदों, वकीलों और प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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