मध्यप्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान बना जन-आंदोलन, 6,330 करोड़ रुपये की लागत से 2 लाख से अधिक जल संरचनाओं का काम पूरा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि मध्यप्रदेश में पारंपरिक जल स्रोतों को बचाने के लिए शुरू किया गया ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ अब एक बड़ा जन-आंदोलन बन चुका है। राज्य सरकार द्वारा नागरिकों की भागीदारी से चलाए जा रहे इस अभियान के तहत प्रदेश में अब तक रिकॉर्ड 2 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण और जीर्णोद्धार सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, जल ही जीवन का मूल आधार है और पुरानी जल प्रणालियों को सुरक्षित रखना सभी का सामाजिक और पर्यावरणीय दायित्व है। इस पुनीत कार्य को गति देकर मध्यप्रदेश आज जल संरक्षण के मामले में देश भर में सबसे आगे खड़ा है।

अभियान के वित्तीय और भौतिक लक्ष्यों की जानकारी देते हुए बताया गया कि जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 के अंतर्गत राज्य में कुल 3,67,777 कार्यों को पूरा करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया था। इस योजना को समय पर और बेहतर गुणवत्ता के साथ जमीन पर उतारने के लिए सरकार ने कुल 10,644.02 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। इसमें से अब तक 6,330.81 करोड़ रुपये (लगभग 59.5 फीसदी) की राशि खर्च की जा चुकी है, जिसकी बदौलत 2,00,844 महत्वपूर्ण परियोजनाओं का काम पूरा हो गया है। इसके अलावा 1,51,093 अन्य कार्य वर्तमान में तेजी से किए जा रहे हैं।

ग्रामीण और खेती-किसानी से जुड़े क्षेत्रों में पानी की कमी को दूर करने के लिए इस अभियान के तहत व्यापक कदम उठाए गए हैं। गांवों को जल प्रबंधन में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से रिकॉर्ड 57,794 खेत तालाबों और 91,838 डग वेल रिचार्ज (कुआं पुनर्भरण) ढांचों को तैयार व मरम्मत किया गया है। इसके साथ ही, पुराने और नए जल स्रोतों को सहेजने के लिए 29,906 जल संरक्षण संरचनाएं और 126 भव्य ‘अमृत सरोवर’ पूरी तरह से बनकर तैयार हैं। सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 1,152 विशेष सिंचाई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को पूरा किया गया है, जबकि पुरानी संरचनाओं को सुधारने के लिए 2,721 मरम्मत कार्य संपन्न किए गए हैं।

इस अभियान का दायरा केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक, पर्यावरणीय और शैक्षणिक सुधारों को भी शामिल किया गया है। भूजल स्तर को ऊपर उठाने के लिए वाटरशेड प्रबंधन के अंतर्गत 4,822 कार्य पूरे किए गए हैं। वहीं, स्कूली बच्चों को स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने के उद्देश्य से ‘WoW मोबाइल ऐप’ के जरिए 5,275 पानी की टंकियों की सफाई कराई गई है। इसके अतिरिक्त, ‘जल संसद जल बंधन 2.0’ (JSJB 2.0) पहल के तहत 21.23 लाख से अधिक कार्यों का पंजीकरण किया गया, जिसमें से 91.3 प्रतिशत कार्यों को समय पर पूरा करने की बेहतरीन दर हासिल की गई है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस बड़ी कामयाबी का श्रेय प्रदेश की जनता, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और शासन के अधिकारियों-कर्मचारियों की मेहनत को दिया है। उन्होंने भरोसा जताया कि मध्यप्रदेश का यह अनूठा जल प्रबंधन मॉडल पूरे देश के लिए एक नजीर साबित होगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भविष्य की पीढ़ियों को पानी के संकट से सुरक्षित रखना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और राज्य इस दिशा में नए प्रयास जारी रखेगा।

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