इंदौर व्यापार मंच 2026: वैश्विक आर्थिक साझेदारी का नया सेतु बन रहा है मध्यप्रदेश

इंदौर में शनिवार को आयोजित ‘भारत-लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन व्यापार एवं निवेश मंच – 2026’ के भव्य उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश वर्तमान में भारत के एक प्रमुख वैश्विक निवेश और निर्यात हब के रूप में अपनी पहचान सुदृढ़ कर रहा है। मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर इस महत्वपूर्ण व्यापार मंच की औपचारिक शुरुआत की। उन्होंने अपने संबोधन में रेखांकित किया कि लैटिन अमेरिकी और कैरेबियन देशों के साथ भारत की बढ़ती आर्थिक आत्मनिर्भरता और सहयोग में मध्यप्रदेश अपनी पूरी औद्योगिक क्षमता के साथ एक मुख्य भागीदार के रूप में सामने आ रहा है।

इस विशिष्ट व्यापार फोरम के उद्घाटन के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रिमोट कंट्रोल के माध्यम से विशेष रूप से तैयार की गई वेबसाइट और डिजिटल प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया। इसके साथ ही उन्होंने दोनों क्षेत्रों के द्विपक्षीय व्यापार पर केंद्रित विशेष व्यावसायिक पत्रिका ‘द बिजनेस टायकून्स’ का विमोचन भी संपन्न किया। मुख्यमंत्री ने इस दौरान निर्यात के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि विगत वित्त वर्ष 2025-26 में मध्यप्रदेश से लैटिन अमेरिका और कैरेबियन देशों को किया जाने वाला निर्यात पिछले वर्ष की तुलना में 19 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि के साथ 3,835 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जिसमें फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर ने अग्रणी भूमिका निभाई है।

लैटिन-अमेरिकी और कैरेबियन देशों से पधारे व्यापारिक डेलीगेट्स का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के हृदय स्थल में स्थित होने के कारण मध्यप्रदेश व्यापार और उद्योगों की स्थापना के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है। यहां की पारदर्शी और स्थिर नीतियां पूरी तरह उद्योग अनुकूल हैं। राज्य में बेहतरीन कानून-व्यवस्था के साथ-साथ कुशल तकनीकी श्रम बल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। प्रदेश में वर्तमान में आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी, ऑटोमोबाइल, फार्मा, फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल और डिफेंस जैसे क्षेत्रों में तीव्र प्रगति हो रही है। उन्होंने बताया कि राज्य के पास उद्योगों की तत्काल स्थापना के लिए 1.25 लाख एकड़ से अधिक का विकसित लैंड बैंक उपलब्ध है। 5 लाख किलोमीटर से अधिक के सुदृढ़ सड़क जाल और आधुनिक रेल व हवाई कनेक्टिविटी ने प्रदेश को लॉजिस्टिक्स का एक बहुत बड़ा केंद्र बना दिया है। आगामी पांच वर्षों में मालवा से बुंदेलखंड और निमाड़ से विंध्य तक के क्षेत्रों को और मजबूती देने के लिए 6 प्रमुख औद्योगिक कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे।

सांस्कृतिक समानताओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह लैटिन अमेरिका की प्राचीन संस्कृतियां ‘मदर अर्थ’ (पचमामा) की आराधना करती हैं, उसी तरह भारतीय संस्कृति में भी प्रकृति के पंच तत्वों को पूजा जाता है। दोनों क्षेत्रों के संगीत, उत्सव, पारिवारिक ताने-बाने और जनजातीय कलाओं में गहरी समानताएं हैं। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर के सुशासन में मालवा को एक विशिष्ट पहचान मिली थी और इंदौर प्राचीन काल में भी सिल्क मार्ग के जरिए वैश्विक व्यापार का एक उन्नत केंद्र हुआ करता था। आज मध्यप्रदेश ‘वोकल फॉर लोकल’ की अवधारणा को साकार करते हुए स्थानीय उत्पादों को वैश्विक श्रृंखला का हिस्सा बना रहा है। मुख्यमंत्री ने इंदौर और पीथमपुर के फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र की सराहना करते हुए कहा कि यहां निर्मित दवाएं ब्राजील, पेरू और चिली जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी धाक जमा रही हैं। उन्होंने क्यूबा के विश्व प्रसिद्ध बायोटेक अनुसंधान के साथ मिलकर चिकित्सा क्षेत्र में नवाचार करने की इच्छा भी जताई।

मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे केवल आयातक-निर्यातक तक सीमित न रहकर संयुक्त उद्यमों की स्थापना और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में सहभागी बनें। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के “विकसित भारत-2047” के विजन को पूरा करने में यह मंच एक सेतु का कार्य करेगा। मध्यप्रदेश की औद्योगिक शक्ति की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में 31 हजार मेगावाट से अधिक बिजली उत्पादन की क्षमता है, जिसमें 30 प्रतिशत हिस्सा पर्यावरण अनुकूल क्लीन एनर्जी का है। इसके अलावा देश में सर्वाधिक हीरा, मैंगनीज और चूना पत्थर जैसे खनिज संसाधन और उद्योगों के लिए पर्याप्त जल उपलब्धता यहां की रीढ़ है। राज्य के 6 हजार से अधिक स्टार्ट-अप्स में से 45 प्रतिशत से अधिक महिलाओं द्वारा संचालित हैं। राज्य सरकार ने औद्योगिक सुगमता के लिए ‘जन विश्वास अधिनियम’ के माध्यम से 108 जटिल नियमों को सरल या समाप्त कर दिया है।

समारोह में उपस्थित भारत में उरुग्वे के राजदूत श्री एमरिला ने कहा कि मध्यप्रदेश ने हमेशा अपने आकर्षण से प्रभावित किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प की सराहना करते हुए कहा कि उरुग्वे ने भारत के साथ व्यापारिक गतिविधियों को काफी तेज किया है और दक्षिण अमेरिका से भारत की ओर उत्पादों की आपूर्ति बढ़ी है, जो कि व्यापारिक संबंधों की एक बेहतरीन शुरुआत है। प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन श्री राघवेंद्र कुमार सिंह ने अपने प्रेजेंटेशन में बताया कि राज्य में कुल 340 अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्र हैं और यह गेहूं उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर है। उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी का गठन किया गया है और सिंगल विंडो सिस्टम सहित 18 उद्योग-केंद्रित नीतियां लागू हैं। ‘ग्लोबल इंडिया बिजनेस फोरम’ के संस्थापक और वैश्विक अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र जोशी ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि इस फोरम का मुख्य उद्देश्य ग्लोबल साउथ को समृद्ध और शक्तिशाली बनाना है। उन्होंने बताया कि इस आयोजन में कुल 15 देशों के व्यापारिक प्रतिनिधि सम्मिलित हुए हैं।

इस महत्वपूर्ण व्यावसायिक फोरम के अवसर पर पेरू, पनामा, अल-सल्वाडोर, क्यूबा और ग्वाटेमाला के राजदूत, गुयाना के उच्चायुक्त, इक्वाडोर के राजदूत, मेक्सिको के महावाणिज्य दूत, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, इंदौर के सांसद श्री शंकर लालवानी, म.प्र. औद्योगिक विकास निगम के प्रबंध संचालक श्री चंद्रमौली शुक्ला सहित देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित उद्योगपति, निवेशक और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

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