इंदौर संभागीय बैठक: रबी फसल की समीक्षा और खरीफ 2026 की तैयारियों पर उच्च स्तरीय मंथन
कृषि उत्पादन आयुक्त श्री अशोक बर्णवाल की अध्यक्षता में सोमवार को इंदौर स्थित एआईसीटीएसएल सभाकक्ष में एक महत्वपूर्ण संभागीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में रबी सीजन 2025-26 के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई और आगामी खरीफ-2026 की पूर्व तैयारियों का खाका तैयार किया गया। बैठक में इंदौर संभाग के समस्त जिलों के कलेक्टर्स, कृषि, सहकारिता, उद्यानिकी एवं अन्य संबद्ध विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया और मैदानी स्तर पर चल रही कृषि गतिविधियों तथा नवाचारों की रिपोर्ट प्रस्तुत की।
प्रशासनिक अमले की उपस्थिति और विभागीय समीक्षा
इस उच्च स्तरीय बैठक में शासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें कृषि विभाग के सचिव श्री निशांत वरवड़े, प्रमुख सचिव सहकारिता श्री डी.पी. आहूजा, उद्यानिकी विभाग के सचिव श्री जान किंग्स ली और संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े शामिल थे। इनके अतिरिक्त इंदौर कलेक्टर श्री शिवम वर्मा, उद्यानिकी संचालक श्री अरविंद दुबे, संभाग के सभी जिलों के जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी, उपायुक्त (राजस्व) श्रीमती सपना लोवंशी और संबंधित विभागों के आला अधिकारी भी उपस्थित थे।
कृषि उत्पादन आयुक्त श्री अशोक बर्णवाल ने कृषि, उद्यानिकी, सहकारिता और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े विभागों की कल्याणकारी योजनाओं और उनकी वर्तमान उपलब्धियों की गहन समीक्षा की। इस दौरान सभी जिला कलेक्टर्स ने अपने-अपने क्षेत्रों में खेती-किसानी को उन्नत बनाने के लिए किए जा रहे प्रशासनिक प्रयोगों और नवाचारों की जानकारी साझा की।
समय-सीमा में लक्ष्य पूर्ति और मैदानी निगरानी के निर्देश
बैठक को संबोधित करते हुए कृषि उत्पादन आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी अधिकारी एक ठोस कार्ययोजना बनाकर तय समय-सीमा के भीतर निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करें। उन्होंने केवल कागजी कार्रवाई के बजाय अधिकारियों को मैदानी स्तर पर जाकर भौतिक सत्यापन करने और योजनाओं की निरंतर मॉनिटरिंग करने को कहा।
बागवानी, वैकल्पिक खेती और तकनीकी नवाचार पर जोर
श्री बर्णवाल ने अधिकारियों से कहा कि वे किसानों के बीच जाकर उन्हें उद्यानिकी (बागवानी) फसलों का रकबा बढ़ाने के लिए प्रेरित करें, क्योंकि इस क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुसार किसानों को कम मुनाफे वाली पारंपरिक फसलों के स्थान पर उच्च मूल्य वाली व्यावसायिक फसलों की खेती की ओर मोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
खेती में वैज्ञानिक अनुसंधानों और आधुनिक तकनीकों के प्रयोग को बढ़ावा देने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर उन्नत बीज और खाद उपलब्ध कराई जाए। कपास उत्पादक क्षेत्रों में कीटों की समस्या से निपटने के लिए बीटी कॉटन के साथ-साथ अन्य प्रजातियों को भी लगाने की सलाह दी गई, जबकि सोयाबीन के स्थान पर अरहर की ‘पूसा-16’ किस्म को अपनाने पर जोर दिया गया ताकि उत्पादन बढ़ सके। किसानों को डीएपी के विकल्प के रूप में जैविक खाद के उपयोग और मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाओं को सुदृढ़ कर मृदा परीक्षण के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए।
कृषक सुविधाएं, पराली प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण
किसानों की सुगमता के लिए प्रत्येक जिले में उर्वरक वितरण केंद्र स्थापित करने तथा भंडारण केंद्रों पर पर्याप्त विश्राम शेड बनाने के निर्देश दिए गए। ई-मंडी प्रणाली के माध्यम से होने वाले भुगतानों में लगने वाले अधिक समय पर चिंता जताते हुए आयुक्त ने इस प्रक्रिया को तेज करने को कहा।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि संभाग में नरवाई (फसल अवशेष) जलाने की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जाए। ऐसा करने वालों के खिलाफ पंचनामा और आर्थिक दंड की कार्रवाई में तेजी लाने को कहा गया। साथ ही, उन्होंने सभी कलेक्टर्स और मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के अंतर्गत संभाग में व्यापक स्तर पर पौधारोपण कराने की जिम्मेदारी सौंपी।
वित्तीय सहायता और अमानक कृषि इनपुट पर कड़ा रुख
सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव श्री डी.पी. आहूजा ने कहा कि किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को तेज किया जाए। उन्होंने पैक्स सदस्यता अभियान के तहत विशेष शिविर लगाकर लक्ष्यों को पूरा करने और सहकारी बैंकों के अधिकारियों को कृषि ऋणों की वसूली में तेजी लाने के निर्देश दिए।
कृषि सचिव श्री निशांत वरवड़े ने नकली और अमानक खाद, बीज एवं कीटनाशक बेचने वाले सटोरियों व विक्रेताओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए सीधे पुलिस थानों में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराने की बात कही। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर उर्वरक खरीदने वाले जमाखोरों की निगरानी की जाए कि वे इसका उपयोग केवल कृषि कार्य में ही कर रहे हैं। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ सुनिश्चित करने के लिए तहसील स्तर पर विशेष शिविर लगाने के निर्देश भी दिए गए। संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े ने बताया कि संभाग में प्राकृतिक एवं जैविक कृषि को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है और किसानों की फार्मर रजिस्ट्री का कार्य तीव्र गति से चल रहा है।
जिलावार उपलब्धियां और स्थानीय नवाचार
बैठक में विभिन्न जिलों के कलेक्टर्स ने अपने यहां चल रहे विशेष प्रयासों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की:
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इंदौर: कलेक्टर श्री शिवम वर्मा ने बताया कि जिले में व्यापक जन-जागरूकता के कारण नरवाई जलाने की घटनाओं में भारी गिरावट आई है। किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक साधन दिए गए हैं। साथ ही, ढक्कनवाला कुआं स्थित ग्रामीण हाट बाजार में सप्ताह में दो दिन प्राकृतिक फल-सब्जियों का बाजार सजता है, जिसे बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। यहां तक कि ब्रिक्स सम्मेलन के विदेशी प्रतिनिधियों को भी इसके अवलोकन के लिए आमंत्रित किया गया है।
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आलीराजपुर: कलेक्टर श्रीमती नीतू माथुर ने जानकारी दी कि जिले में आम, पपीता और सीताफल जैसे फलों तथा भिंडी-टमाटर जैसी सब्जियों के नए क्लस्टर बनाकर अधिक से अधिक कृषकों को जोड़ा जा रहा है।
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झाबुआ: कलेक्टर डॉ. योगेश भरसट ने बताया कि जिले में तरबूज का भारी उत्पादन हो रहा है, जो किसानों की आय बढ़ाने का जरिया बन गया है।
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बड़वानी: कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह ने बताया कि बड़वानी के केलों की मांग अब विदेशों तक पहुंच चुकी है और जिले में मोटे अनाज (मिलेट्स) के उत्पादन पर विशेष बल दिया जा रहा है।
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खरगोन: कलेक्टर श्रीमती भव्या मित्तल ने बताया कि सफेद मूसली के प्रचुर उत्पादन ने किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारा है और नवाचार के तौर पर हाइब्रिड मक्का की खेती शुरू की गई है।
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खण्डवा: कलेक्टर श्री ऋषभ गुप्ता ने बताया कि चीया और कोदो-कुटकी जैसी फसलों के उत्पादन से किसानों को बेहतरीन दाम मिल रहे हैं और साथ ही कुसुम की खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
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धार: कलेक्टर श्री राजीव रंजन मीणा ने बताया कि जिले में ब्लूबेरी की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
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बुरहानपुर: कलेक्टर श्री हर्ष सिंह ने साझा किया कि जिले में ड्रिप इरिगेशन (टपक सिंचाई) तकनीक के माध्यम से केले का बंपर उत्पादन कर किसान शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं।

