ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को आधुनिक बनाने पर जोर, इंदौर में संभागीय बैठक संपन्न
पशुपालन और मत्स्य पालन के जरिए ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के उद्देश्य से सोमवार को इंदौर में एक महत्वपूर्ण संयुक्त संभागीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री अशोक बर्णवाल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पशुपालन, डेयरी और मछुआ कल्याण विभाग के कामकाज की बारीकी से समीक्षा की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक में प्रमुख सचिव (पशुपालन) श्री उमाकांत उमराव, सचिव (मत्स्य पालन) श्री स्वतंत्र कुमार सिंह, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े और कलेक्टर श्री शिवम वर्मा सहित इंदौर संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक के दौरान कृषि उत्पादन आयुक्त श्री अशोक बर्णवाल ने स्पष्ट किया कि पशुपालन को महज एक सहायक धंधा न माना जाए, बल्कि इसे ग्रामीण क्षेत्रों में आय बढ़ाने का एक मुख्य जरिया बनाया जाए। उन्होंने अधिकारियों को हर गांव में कम से कम एक “लखपति गोपालक दीदी” तैयार करने का लक्ष्य सौंपते हुए कहा कि महिला स्व-सहायता समूहों को इन गतिविधियों से जोड़ा जाए। इससे महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण होगा और उनके परिवारों की आमदनी में बड़ा बदलाव आएगा।
दुग्ध व्यवसाय को अधिक संगठित करने की जरूरत पर बल देते हुए श्री बर्णवाल ने कहा कि ‘क्षीरधारा ग्राम योजना’ को जमीन पर प्रभावी ढंग से उतारा जाए। गांवों के दुग्ध उत्पादकों को आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक तरीकों और बेहतर बाजार व्यवस्था का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ाने के लिए ‘हिरण्यगर्भ नस्ल सुधार अभियान’ को परिणामोन्मुखी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कृत्रिम गर्भाधान और नई तकनीकों की मदद से पशुओं की उत्पादकता बढ़ाई जाए और पशुपालकों को पौष्टिक व संतुलित आहार के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
इस मौके पर प्रमुख सचिव श्री उमाकांत उमराव ने राज्य को उन्नत नस्ल के पशुओं के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता रेखांकित की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में उच्च गुणवत्ता वाले पशुओं के लिए हमारे पशुपालकों को दूसरे राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है। यदि राज्य में ही ऐसी उत्तम नस्लें तैयार होने लगेंगी, तो स्थानीय स्तर पर कम खर्च में पशु उपलब्ध होंगे, जिससे पशुपालकों का मुनाफा बढ़ेगा। बैठक में पशु प्रजनन के क्षेत्र में सक्रिय किसानों और उद्यमियों को जोड़कर ब्रीडर संघ बनाने तथा ‘डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना’ का लाभ समय पर पात्र लोगों तक पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में गौशालाओं के कायाकल्प और उन्हें स्वावलंबी बनाने पर भी विस्तृत चर्चा हुई। कृषि उत्पादन आयुक्त ने निर्देश दिए कि गौशालाओं को केवल मवेशियों के रख-रखाव तक सीमित न रखकर जैविक खेती, वर्मी कम्पोस्ट और गोबर गैस जैसे आय बढ़ाने वाले केंद्रों के रूप में विकसित किया जाए। विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में दूध का उत्पादन बढ़ाना शामिल होना चाहिए, जिसके लिए बेहतर चारे और नियमित पशु स्वास्थ्य जांच को बढ़ावा दिया जाए।
अंत में, मछुआ कल्याण और मत्स्य पालन विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए श्री बर्णवाल ने तालाबों और जलाशयों का पूरा उपयोग कर मछली उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने केज कल्चर (केज पद्धति) को अपनाने पर जोर दिया ताकि कम जगह में वैज्ञानिक तरीके से अधिक उत्पादन लिया जा सके, जिससे मछुआरों की आय में सुधार होगा। उन्होंने अधिकारियों को सभी योजनाओं को समय सीमा के भीतर और जनहित को ध्यान में रखते हुए पूरा करने की हिदायत दी, ताकि ग्रामीण रोजगार और अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सके।

