शासकीय कार्यालयों को दिव्यांगों के अनुकूल बनाने और पाठ्यक्रम में नशामुक्ति जागरूकता शामिल करने के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को भोपाल स्थित मंत्रालय में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों की सुगम आवाजाही के लिए राज्य के सभी सरकारी भवनों को पूरी तरह बाधारहित और सुलभ बनाया जाना अनिवार्य है। इसके साथ ही उन्होंने बच्चों के भीतर दिव्यांगता को लेकर संवेदनशीलता बढ़ाने के उद्देश्य से स्कूली पाठ्यक्रम में इससे जुड़ी विशेष सामग्री शामिल करने की बात कही। बैठक में विभाग के मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा और मुख्य सचिव अनुराग जैन भी विशेष रूप से मौजूद रहे।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में नशामुक्ति अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी संबद्ध विभागों को आपसी समन्वय के साथ इस दिशा में काम करना होगा ताकि किशोरों और युवाओं को नशे के घातक परिणामों से समय रहते सचेत किया जा सके। समाज में नशे के खिलाफ एक सकारात्मक माहौल तैयार करने के लिए मुख्यमंत्री ने स्कूल और कॉलेज के स्तर पर जागरूकता से जुड़ी पाठ्य सामग्री को सिलेबस का हिस्सा बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर प्रदान करने और उनकी योग्यता के अनुसार कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) के कार्यक्रम आयोजित करने के लिए भी कहा।
समीक्षा बैठक में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को विभिन्न योजनाओं की प्रगति से अवगत कराया। अधिकारियों ने बताया कि ‘मुख्यमंत्री सेवा पखवाड़ा अभियान वर्ष 2025’ के अंतर्गत प्रदेश भर के दिव्यांगों को 6 करोड़ 52 लाख रुपये मूल्य के कृत्रिम अंग और अन्य सहायक उपकरण वितरित किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य में दिव्यांग बच्चों के लिए चल रहे विशेष स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था को आधुनिक बनाते हुए 168 स्मार्ट क्लासरूम तैयार किए गए हैं।
नशामुक्ति के प्रयासों की जानकारी देते हुए बैठक में बताया गया कि ‘नशामुक्ति भारत अभियान’ के तहत मध्य प्रदेश में 12 हजार स्वयंसेवकों (वालेंटियर्स) को जोड़ा गया है, जो आम लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक कर रहे हैं। दिव्यांगों को रोजगार से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार से पुरस्कृत संस्थानों के साथ अनुबंध (एमओयू) किया गया है, जिसके माध्यम से अब तक 12 दिव्यांगजनों को निजी क्षेत्र में रोजगार मिला है। साथ ही, बुजुर्गों की बेहतर देखभाल सुनिश्चित करने के लिए 54 प्रतिभागियों को ‘केयर-गिवर’ का विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारतीय संस्कृति का हवाला देते हुए एक अनूठा सुझाव भी रखा। उन्होंने कहा कि हमारे समाज में जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ या पूर्वजों की स्मृति जैसे मौकों पर जरूरतमंदों को भोजन कराने की पुरानी परंपरा रही है। इस तरह की व्यक्तिगत और सामाजिक पहलों को एक व्यवस्थित रूप देकर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर निराश्रित लोगों के लिए भोजन की पक्की व्यवस्था के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। इस उच्च स्तरीय बैठक में अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, संजय शुक्ला, मनीष रस्तोगी और प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली वायंगणकर सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।


