मध्य प्रदेश में होनहार छात्रों की छात्रवृत्ति योजना की होगी बेहतर मॉनिटरिंग, जिला नोडल अधिकारियों को मिला प्रशिक्षण

राज्य के आर्थिक रूप से विपन्न लेकिन मेधावी विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा के अवसर देने के लिए गुरुवार को भोपाल में एक विशेष राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। राज्य शिक्षा केंद्र के तत्वावधान में पलाश रेसीडेंसी में हुई इस बैठक में राष्ट्रीय मेरिट कम मीन्स छात्रवृत्ति योजना के क्रियान्वयन को और अधिक पारदर्शी तथा प्रभावी बनाने की रणनीति तैयार की गई। इसमें सभी जिलों के नोडल अधिकारियों और उनके तकनीकी सहायकों ने हिस्सा लिया, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षित किया गया।
इस महत्वपूर्ण कार्यशाला का औपचारिक उद्घाटन भारत सरकार के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के वरिष्ठ सलाहकार श्री राघवेंद्र खरे, छात्रवृत्ति प्रकोष्ठ के उपसंचालक डॉ. मुकेश शर्मा तथा राज्य शिक्षा केंद्र के संयुक्त संचालक श्री प्राचीश जैन द्वारा किया गया। कार्यशाला का मुख्य ध्यान नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) पर विद्यार्थियों के नए रजिस्ट्रेशन और रिन्यूअल की प्रक्रिया को सरल व त्रुटिहीन बनाने पर रहा।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान जिला स्तरीय अधिकारियों को छात्रवृत्ति के सटीक चयन और उसकी लगातार निगरानी करने के गुर सिखाए गए। नई दिल्ली से आए केंद्रीय प्रतिनिधियों सुश्री सोनल नागर, श्रीमती रीता और तकनीकी समन्वयक श्री श्याम मनोहर शर्मा ने मैदानी अधिकारियों द्वारा पूछे गए पेचीदा तकनीकी सवालों का मौके पर ही निवारण किया। इस सत्र में राज्य नोडल अधिकारी श्री आनंद शर्मा, श्रीमती अनुराधा यादव और राज्य समन्वयक श्रीमती ज्योति श्रीवास्तव भी उपस्थित रहीं।
विभागीय नियमों के अनुसार, राष्ट्रीय मेरिट कम मीन्स छात्रवृत्ति का लाभ सरकारी, अनुदान प्राप्त और स्थानीय निकायों के विद्यालयों में पढ़ने वाले आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को मिलता है। केंद्र सरकार के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा आयोजित की जाने वाली विशेष परीक्षा के माध्यम से योग्य बच्चों को चुना जाता है, जिन्हें कक्षा 9वीं से 12वीं तक सालाना 12,000 रुपये की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है।
इस छात्रवृत्ति योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ शर्तें तय हैं, जिसके तहत विद्यार्थी का पिछली कक्षा (सातवीं) में न्यूनतम ‘सी’ ग्रेड से उत्तीर्ण होना आवश्यक है। इसके अलावा, छात्र के अभिभावकों की समस्त स्रोतों से वार्षिक आय 3.50 लाख रुपये की सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए। इस योजना के तहत मध्य प्रदेश के हिस्से में कुल 6,446 छात्र-छात्राओं का कोटा निर्धारित है, जिनका चयन हर वर्ष मेरिट लिस्ट के आधार पर किया जाता है।


