ब्लैक सी मिसाइल हमले के बाद एस. जयशंकर ने सर्गेई लावरोव से की मुलाकात, भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस के अपने समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ एक अहम बैठक में द्विपक्षीय संबंधों और द्विपक्षीय सहयोग के सभी प्रमुख पहलुओं पर चर्चा की। हाल ही में ब्लैक सी में एक वाणिज्यिक पोत पर हुए मिसाइल हमले में चार भारतीय नाविकों की दुखद मृत्यु के बाद दोनों देशों के शीर्ष कूटनीतिज्ञों के बीच यह पहली आमने-सामने की उच्चस्तरीय वार्ता थी। बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच व्यापार, ऊर्जा, कनेक्टिविटी, निवेश, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अलावा क्षेत्रीय व वैश्विक घटनाक्रमों पर गहन चर्चा हुई।
विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ के जरिए इस बैठक की पुष्टि करते हुए बताया कि बातचीत के दौरान भारत और रूस के आपसी संबंधों की समग्र समीक्षा की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस वार्ता में प्रभावित क्षेत्र में मौजूद भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर भारत की गंभीर चिंताओं को प्रमुखता से रूस के समक्ष रखा गया। इसके साथ ही, दोनों देशों के नेताओं ने जारी यूक्रेन संघर्ष और खाड़ी क्षेत्र के ताजा हालात पर भी अपने विचार साझा किए।
गौरतलब है कि गत 19 जुलाई को यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से रवाना हो रहे वाणिज्यिक जहाज ‘एमवी गोल्डन लियो’ पर एक रूसी मिसाइल आ गिरी थी, जिससे उसमें सवार चार भारतीय नागरिकों की जान चली गई। 17 सदस्यीय क्रू वाले इस जहाज पर कुल पांच भारतीय सवार थे, जिनमें से एक भारतीय नागरिक गंभीर रूप से घायल हुआ था।
इस घटना के तुरंत बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में रूसी कूटनीतिज्ञ (चार्ज डी’ अफेयर्स) को तलब करके अपना कड़ा विरोध जताया था। भारतीय विदेश मंत्रालय ने वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की कड़े शब्दों में भर्त्सना करते हुए साफ कहा था कि निर्दोष क्रू मेंबर्स की जान खतरे में डालना और अंतरराष्ट्रीय व्यापार व नौवहन की स्वतंत्रता को बाधित करना पूरी तरह से अस्वीकार्य है, तथा ऐसी कार्रवाइयों से बचा जाना चाहिए।
उधर, ‘कीव पोस्ट’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि तुर्किए के इस मालवाहक जहाज ‘गोल्डन लियो’ पर हुए मिसाइल हमले के दौरान कुल 10 लोगों की मृत्यु हुई थी। इस दुखद घटना के सामने आने के बाद से ही भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर पूरी तरह सतर्क और प्रयासरत है।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) से जुड़े वार्षिक आयोजनों में भाग लेने के लिए मनीला पहुंचे हैं। पश्चिमी देशों द्वारा बनाए जा रहे लगातार दबाव के बीच लावरोव की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र में रूस की राजनयिक, आर्थिक और सुरक्षा स्थिति को और मजबूत बनाना है।



