मध्य प्रदेश में वन पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की बैठक में दिए निर्देश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित मध्यप्रदेश राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की 32वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए वन विभाग को राज्य में तेजी से बढ़ रही पर्यटन संभावनाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में वन पर्यटन के विस्तार की प्राकृतिक अनुकूलता है, वहां वन विभाग और पर्यटन विभाग मिलकर एक संयुक्त और व्यावहारिक कार्य योजना तैयार करें। मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश की समृद्ध प्राकृतिक संपदा, जैव विविधता और वन्यजीव पर्यटन की अपार क्षमताएं राज्य की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।

पर्यटन गतिविधियों के विस्तार पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने ‘होम स्टे’ योजना को प्रोत्साहन देने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि इस पहल से स्थानीय निवासियों, वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और जनजातीय परिवारों को उनके ही क्षेत्र में आजीविका और अतिरिक्त आय के नए अवसर प्राप्त होंगे। वन पर्यटन का उद्देश्य केवल पर्यटकों को सुविधाएं देना नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका मुख्य लाभ जंगलों के आसपास बसे समुदायों की सामाजिक और आर्थिक समृद्धि के रूप में सामने आना चाहिए। स्थानीय लोगों की सहभागिता से पर्यटकों को क्षेत्रीय संस्कृति और परंपराओं को करीब से जानने का मौका मिलेगा।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अन्य राज्यों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखने और वयस्क व स्वस्थ वन्य जीवों के आदान-प्रदान का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश अपने यहां मौजूद बाघों को आंध्र प्रदेश, असम और कर्नाटक जैसे राज्यों को देकर उनके बदले में हाथी, गेंडे और अन्य वन्य जीव प्राप्त कर सकता है। इसके साथ ही, उन्होंने वन भूमि के गैर-वानिकी उपयोग और डायवर्सन पर सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए और स्पष्ट किया कि वन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का अवैध उत्खनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

राज्य वन्य प्राणी बोर्ड की इस बैठक में राष्ट्रीय उद्यानों और टाइगर रिजर्व क्षेत्रों के अंतर्गत बुनियादी ढांचे के विकास तथा वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कुल 30 प्रस्ताव विचार-विमर्श के लिए प्रस्तुत किए गए, जिन्हें सर्वसम्मति से स्वीकृति प्रदान की गई। स्वीकृत प्रस्तावों में राष्ट्रीय उद्यानों की सीमा में आने वाले वन ग्रामों में सीसी रोड और पक्की सड़कों का निर्माण, मोबाइल टावरों की स्थापना, उप स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण तथा विद्युत लाइनों को बिछाने जैसे जनसुविधा के कार्य शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इन क्षेत्रों में कोई भी विकास कार्य स्थानीय आबादी को विश्वास में लेकर ही शुरू किया जाए।

पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन पर जोर देते हुए डॉ. यादव ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मानव और वन्यजीवों के बीच किसी भी प्रकार के संघर्ष को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्रों में जनसुविधाओं का विस्तार इस तरह किया जाए जिससे वन्यजीवों के संरक्षण पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े। इसके अतिरिक्त, बोर्ड में विशेषज्ञ सलाह के लिए केंद्र सरकार और राज्य के पुरातत्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल करने का निर्णय भी लिया गया।

इस महत्वपूर्ण बैठक में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव वन राघवेंद्र कुमार सिंह, पीसीसीएफ सुधिरंजन सेन और मुख्य वन्य प्राणी संरक्षक समीता राजौरा सहित बोर्ड के अन्य सम्मानित सदस्य एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

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